गाजियाबाद कमिश्नरेट ने अपराध के बाद बदमाशों की घेराबंदी को लेकर अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब किसी भी गंभीर वारदात के बाद अपराधियों को भागने का मौका नहीं मिलेगा। इसके लिए पुलिस ने एक ऐसी नाकाबंदी व्यवस्था तैयार की है, जिसमें अपराध होते ही जिले की सीमाएं खुद-ब-खुद पुलिस घेरे में आ जाएंगी।
सभी पॉइंट्स पर होगी चेकिंग
इस प्लान के तहत पूरे कमिश्नरेट क्षेत्र में पहले से ही 40 ऐसे स्थान चिन्हित किए गए हैं, जहां से अपराधी अक्सर जिले से बाहर निकलने की कोशिश करते हैं। इन सभी प्वाइंट्स पर तुरंत पुलिस तैनात की जाएगी। हर स्थान पर एक पीआरवी के साथ पर्याप्त संख्या में पुलिस बल मौजूद रहेगा। इस योजना में कुल 605 जवानों और होमगार्डों की ड्यूटी तय की गई है, ताकि चेकिंग में कोई ढिलाई न रहे।
दरअसल, गाजियाबाद की भौगोलिक स्थिति पुलिस के लिए हमेशा चुनौती रही है। दिल्ली समेत गौतमबुद्धनगर, हापुड़, मेरठ और बागपत से सीधी कनेक्टिविटी होने के कारण अपराधी वारदात के बाद तेजी से सीमा पार कर जाते हैं। इसी कमजोरी को खत्म करने के लिए यह नया नाकाबंदी मॉडल तैयार किया गया है।
पुलिस ने बॉर्डर इलाकों पर जिग-जैग बैरियर लगाए हैं, ताकि वाहनों की गति धीमी हो और हर गाड़ी की जांच की जा सके। सभी नाकाबंदी स्थलों को कंट्रोल रूम से जोड़ा गया है और वहां नाइट विजन कैमरे लगाए गए हैं। रात के समय चेकिंग को प्रभावी बनाने के लिए हाई-पावर लाइटिंग की व्यवस्था भी की गई है।
तीन स्तर पर चेकिंग
पुलिस आयुक्त के निर्देश पर जिले में तीन स्तर पर चेकिंग लागू की गई है। इसमें स्थानीय थाना पुलिस, स्टेटिक चेकिंग टीमें और चीता, पीसी व पीआरवी को एक साथ सक्रिय रखा जाएगा। यूपी-112 की गाड़ियां भी इस पूरी व्यवस्था का हिस्सा होंगी। ड्यूटी पर तैनात जवानों को बॉडी वार्न कैमरे, बुलेट प्रूफ जैकेट और अन्य सुरक्षा उपकरण दिए गए हैं।
इसके अलावा रेलवे ट्रैक, हाईवे और उनसे सटे गांवों व मोहल्लों में लगातार पेट्रोलिंग की जाएगी। किसी भी घटना की स्थिति में ड्रोन और सीसीटीवी के जरिए पूरे इलाके पर पैनी नजर रखी जाएगी, ताकि अपराधी एक कदम भी आगे न बढ़ सकें।