मथुरा जिले में यमुना नदी की बाढ़ ने इस बार हालात को गंभीर बना दिया है। वर्ष 2023 का रिकॉर्ड तोड़ते हुए यमुना का जलस्तर खतरे के निशान 166 मीटर को पार कर 167.55 मीटर तक पहुंच गया। जिले के चार तहसीलों के 45 गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। ऐसे में हालात का जायजा लेने के लिए जिलाधिकारी सीपी सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने रविवार को ट्रैक्टर पर बैठकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान दोनों ने लोगों से बातचीत भी की। इस तरह का दौरा, जिसमें वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी स्वयं ग्राउंड पर उतरते हैं, लोगों के मन में सुरक्षा और राहत की भावना को और मजबूत करता है।
दोनों ने किया निरीक्षण
जानकारी के मुताबिक, इस दौरान दोनों अधिकारी लक्ष्मी नगर, तिवारीपुरम, और यमुनापार जैसे इलाकों में पहुंचे, जहां पानी ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। डीएम और एसएसपी ने बाढ़ शरणालयों में रह रहे लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं और उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने विशाल मैरिज होम में बनाए गए शेल्टर होम का निरीक्षण किया, जहां बाढ़ से विस्थापित लोगों को अस्थायी रूप से ठहराया गया है।
बाढ़ की स्थिति में ट्रैक्टर से दौरा करना प्रशासन की संवेदनशीलता और तत्परता को दर्शाता है। दोनों अधिकारियों ने मौके पर राहत सामग्री के वितरण, चारे की उपलब्धता और पशुओं की सुरक्षा की व्यवस्था भी जांची। सुभाष इंटर कॉलेज में बनाए गए पशु शरण स्थल का निरीक्षण करते हुए डीएम ने चारा वितरण और साफ-सफाई की व्यवस्था का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए।
डीएम ने दी जानकारी
डीएम ने बाढ़ प्रभावित लोगों से यमुना के किनारों से दूर रहने और शरणालयों में रहने की अपील की, ताकि किसी अनहोनी से बचा जा सके। प्रशासन की ओर से अब तक 4205 लोगों को शरणालयों में भेजा जा चुका है, जबकि 600 से अधिक पशुओं को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। साथ ही 1250 राशन किट बांटी गई हैं और 4785 लोगों को पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।