सड़क सुरक्षा पर डीजीपी का सख्त रुख, 245 थाना क्षेत्रों में ट्रैफिक ट्रेनिंग शुरू

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उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए डीजीपी राजीव कृष्ण ने सख्त रुख अपनाया है। उनका कहना है कि सड़क सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों पर केवल जुर्माना लगाने से ज्यादा जरूरी है कि उन्हें नियमों की समझ दी जाए। इसी दिशा में प्रदेश के 245 थाना क्षेत्रों में ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की विशेष ट्रेनिंग शुरू की गई है, जिसके शुरुआती नतीजे भी सामने आने लगे हैं।

डीजीपी ने कहा ये

डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा है कि सड़क दुर्घटनाएं रोकने के लिए नियम तोड़ने वालों से सिर्फ जुर्माना वसूलना ही समाधान नहीं है। जब तक लोगों को ट्रैफिक नियमों की सही जानकारी और उनके पालन की अहमियत नहीं समझाई जाएगी, तब तक हादसों पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है। इसी सोच के तहत यूपी पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है।

प्रदेश के 55 जिलों में सबसे अधिक सड़क हादसों वाले 245 थाना क्षेत्रों की पहचान की गई है। इन थाना क्षेत्रों में तैनात ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है। इस प्रशिक्षण में सड़क सुरक्षा, ट्रैफिक नियमों के पालन, लोगों से व्यवहार और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है।

मिल रहे अच्छा परिणाम

डीजीपी ने बताया कि प्रशिक्षण के पहले चरण में इटावा, बहराइच, हमीरपुर और लखनऊ जैसे जिलों में सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो महीनों में 20 जिलों में सड़क हादसों में औसतन 58 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है, जो इस पहल की सफलता को दर्शाता है।

इसके अलावा डीजीपी ने निर्देश दिए हैं कि पुलिस अकादमी की तर्ज पर जिला स्तर पर भी प्रशिक्षण मॉडल तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि अफसर अपने जिलों में इस ट्रेनिंग को प्राथमिकता से लागू करें और हर स्तर पर इसकी निगरानी सुनिश्चित की जाए।

डीजीपी ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रैफिक पुलिस की जिम्मेदारी सिर्फ चालान काटना नहीं, बल्कि लोगों को सुरक्षित यातायात के प्रति जागरूक करना भी है। आने वाले समय में इस मॉडल को पूरे प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि सड़क हादसों में लगातार कमी लाई जा सके।

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