उत्तर प्रदेश पुलिस में जवाबदेही और कार्यकुशलता को लेकर पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा एक्शन लिया है। पुलिस मुख्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय अपराध समीक्षा बैठक में डीजीपी ने साफ शब्दों में संदेश दिया कि लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी और प्रोएक्टिव पुलिसिंग ही प्राथमिकता होगी।
हुई ये कार्रवाई
इस बैठक के बाद पहली बार सड़क हादसों और ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार न लाने वाले अधिकारियों पर सीधी कार्रवाई की गई है। प्रदेश के पांच थाना प्रभारियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। इसके अलावा बाराबंकी और जौनपुर में तैनात दो क्षेत्राधिकारी (ट्रैफिक) के खिलाफ प्रारंभिक जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं। यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि अब प्रदर्शन के आधार पर ही जिम्मेदारियों का मूल्यांकन होगा।
डीजीपी ने आगामी पर्वों को देखते हुए सभी जिलों को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आयोजकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर दिया। साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
जन शिकायत निस्तारण प्रणाली (IGRS) को लेकर भी डीजीपी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे स्वयं जनसुनवाई करें और शिकायतों का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करें।
दिए निर्देश
मीडिया समन्वय को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। डीजीपी ने कहा कि हर घटना की तथ्यात्मक और अपडेटेड जानकारी समय पर साझा की जाए, साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी सही सूचना तत्काल उपलब्ध कराई जाए।
डीजीपी राजीव कृष्ण का यह सख्त एक्शन साफ संकेत है कि अब उत्तर प्रदेश पुलिस में लापरवाही की कोई जगह नहीं है और जवाबदेही तय करते हुए व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।