उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से सामने आया एक चौंकाने वाला मामला यह दिखाता है कि साइबर और एजुकेशन फ्रॉड अब किस हद तक पहुंच चुके हैं। मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने के नाम पर ठगों ने इस बार किसी आम व्यक्ति को नहीं, बल्कि जिला कारागार के जेल अधीक्षक को ही अपना शिकार बना लिया। ठगों ने उनकी बेटी को एमबीबीएस में एडमिशन दिलाने का झांसा देकर करीब 50 लाख रुपये हड़प लिए और फिर फरार हो गए।
ये है मामला
जानकारी के मुताबिक उन्नाव जिला जेल के अधीक्षक पंकज कुमार सिंह अपनी बेटी के मेडिकल करियर को लेकर प्रयास कर रहे थे। नीट काउंसलिंग के जरिए एडमिशन के लिए उन्होंने ऑनलाइन सर्च के दौरान एक कंसल्टेंसी से संपर्क किया। यह संपर्क ‘जस्ट डायल’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से लखनऊ स्थित ‘स्टडी पाथवे कंसलटेंसी’ से हुआ। बातचीत के दौरान कंसल्टेंसी संचालक अभिनव शर्मा ने भरोसा दिलाया कि उनकी बेटी का एमबीबीएस में दाखिला एक निजी मेडिकल कॉलेज में तय हो जाएगा।
आरोपी के झांसे में आकर जेल अधीक्षक ने पहले 20 लाख रुपये डिमांड ड्राफ्ट के जरिए दिए। इसके बाद अलग-अलग तारीखों में 30 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से आरोपी द्वारा बताए गए बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए। कुल मिलाकर 50 लाख रुपये एडमिशन की प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर लिए गए।
समस्या तब सामने आई जब काफी समय बीतने के बावजूद एडमिशन से जुड़ी कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई। फोन करने पर आरोपी के मोबाइल बंद मिलने लगे। इसके बाद जब जेल अधीक्षक लखनऊ स्थित कंसल्टेंसी के कार्यालय पहुंचे तो वहां ताला लटका मिला। आसपास पूछताछ करने पर पता चला कि आरोपी पहले भी कई लोगों से इसी तरह मेडिकल एडमिशन के नाम पर मोटी रकम ऐंठ चुका है।
जांच कर रही पुलिस
अपने साथ हुई ठगी का एहसास होते ही जेल अधीक्षक ने सदर कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने कंसल्टेंसी संचालक और उसके सहयोगियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर लिया है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है।