आगरा कमिश्नरेट में तैनात पुलिसकर्मियों के व्यवहार और मानसिक स्थिति को लेकर किए गए एक आंतरिक सर्वे में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। वर्दी पहनने से पहले जिन आदर्शों, सेवा भाव और अनुशासन की बात पुलिसकर्मी करते थे, खाकी पहनने के बाद उनमें काफी बदलाव देखा गया। सर्वे में शामिल करीब एक हजार पुलिसकर्मियों में से आधे ने स्वीकार किया कि वे वर्दी में रौब दिखाने लगते हैं और आम नागरिकों द्वारा सम्मान न मिलने पर उन्हें गुस्सा आता है।
तनाव से जूझ रहे जवान
सर्वे के अनुसार, लगभग 80 प्रतिशत पुलिसकर्मी लंबे ड्यूटी घंटे और पर्याप्त छुट्टियां न मिलने के कारण मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं। इसका असर उनके पारिवारिक जीवन पर भी पड़ रहा है। कई पुलिसकर्मियों ने माना कि वे परिवार को समय नहीं दे पाते, जिससे पत्नी और बच्चों के साथ रिश्तों में खटास आ रही है। केवल 20 प्रतिशत पुलिसकर्मी ही अपने व्यवहार और सोच को लेकर सकारात्मक नजर आए।
डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास के अनुसार, थानों और चौकियों पर आम लोगों के साथ दुर्व्यवहार, बात न सुनने और मारपीट जैसी शिकायतें लगातार मिल रही थीं। इन्हीं शिकायतों को कम करने के उद्देश्य से व्यवहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया। इस सर्वे और प्रशिक्षण को व्यवहार विज्ञानी और लाइफ कोच डॉ. नवीन गुप्ता की टीम ने संचालित किया।
समूह चर्चाओं के दौरान पुलिसकर्मियों ने खुलकर अपनी समस्याएं रखीं। उन्होंने बताया कि वीआईपी ड्यूटी, नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों का दबाव, ट्रैफिक ड्यूटी के दौरान जनता का आक्रोश, सब मिलकर तनाव बढ़ा देते हैं। कई पुलिसकर्मियों ने यह भी कहा कि समाज में पुलिस की छवि के कारण उन्हें किराये पर मकान नहीं मिलता, बच्चों के स्कूल एडमिशन में दिक्कत होती है और यहां तक कि शादी में भी बाधाएं आती हैं।
लिया जाएगा फीडबैक
प्रशिक्षण के दौरान उन्हें यह समझाया गया कि व्यवहार में बदलाव लाकर ही समाज की सोच बदली जा सकती है। कानून व्यवस्था से समझौता किए बिना मानवीय और सम्मानजनक व्यवहार अपनाने पर जोर दिया गया। आने वाले समय में थानों में जाकर फीडबैक लिया जाएगा, ताकि यह देखा जा सके कि प्रशिक्षण का वास्तविक असर पुलिसकर्मियों के व्यवहार में कितना पड़ा है।