मणिकर्णिका घाट विवाद: AI जनरेटेड तस्वीरों से भ्रम फैलाने पर आठ लोगों पर FIR

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मणिकर्णिका घाट विवाद को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वाराणसी जिले में आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। यह कार्रवाई मणिकर्णिका घाट के सुंदरीकरण कार्य को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाई गई भ्रामक और गलत सूचनाओं के संबंध में की गई है। पुलिस के अनुसार, एआई जनरेटेड तस्वीरों और वीडियो के माध्यम से यह भ्रम फैलाने की कोशिश की गई कि घाट और मंदिरों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है।

पुलिस ने की कार्रवाई 

शनिवार को वाराणसी दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पूरे मामले पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण के समय भी इसी तरह की साजिशें रची गई थीं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने जानबूझकर मूर्ति निर्माण की वर्कशॉप से टूटी हुई मूर्तियों के अवशेष इकट्ठा किए और उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इसके बाद यह झूठा प्रचार किया गया कि मंदिरों को तोड़ा जा रहा है, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं था।

सीएम योगी ने कहा कि काशी की आस्था, संस्कृति और विरासत को बदनाम करने की कोशिश करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार काशी के विकास के साथ-साथ उसकी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

पुलिस ने मणिकर्णिका घाट के सुंदरीकरण कार्य को लेकर भ्रामक सूचना फैलाने के आरोप में चौक थाने में प्राथमिकी दर्ज की है। इस एफआईआर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) के कुछ हैंडल को भी नामजद किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन ने की अपील

प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल हो रही किसी भी जानकारी पर आंख मूंदकर भरोसा न करें और अफवाहों से दूर रहें। साथ ही, काशी के विकास कार्यों को लेकर फैलाए जा रहे झूठ और भ्रम के खिलाफ सतर्क रहने की जरूरत बताई गई है।

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