उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में तैनात दरोगा अजय गोंड की संदिग्ध मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सरयू नदी में शव मिलने के बाद मामला और गंभीर हो गया है, लेकिन अब इस पूरे प्रकरण में मृतक के छोटे भाई और झांसी में तैनात एडीएम अरुण गौड़ के आरोपों ने नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने जांच की पारदर्शिता और स्थानीय पुलिस की भूमिका पर सीधा सवाल उठाया है।
एडीएम भाई ने लगाए आरोप
अरुण गौड़ का कहना है कि 6 फरवरी को भाई के लापता होने की सूचना मिलते ही वे बस्ती पहुंचे, लेकिन पुलिस ने तलाश में अपेक्षित सहयोग नहीं किया। उनका आरोप है कि जिस दिन दरोगा अजय गोंड गायब हुए, उस दिन थाने का सीसीटीवी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, जबकि नियमानुसार फुटेज सुरक्षित रहनी चाहिए थी। यह तथ्य उनके संदेह को और गहरा करता है।
उन्होंने बताया कि पुलिस की ओर से संतोषजनक जवाब न मिलने पर उन्हें खुद दुकानों और आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगालने पड़े। इंस्पेक्टर और सीओ से पूछताछ के बावजूद उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। उनका कहना है कि एक पुलिस अधिकारी ड्यूटी पर निकले और फिर अचानक लापता हो गए, यह सामान्य घटना नहीं हो सकती।
आगे कहा ये
अरुण गौड़ ने साफ कहा है कि उन्हें किसी आर्थिक मुआवजे की आवश्यकता नहीं है। उनकी मांग केवल निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की है। उन्होंने बाहरी एजेंसी या सीबीआई से जांच कराने की मांग उठाई है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ड्यूटी के दौरान गायब होने के बाद आखिर क्या हुआ।