उत्तर प्रदेश के संभल जनपद में हाल ही में हिंसा के बाद चर्चा में आए पुलिस अधिकारी अनुज चौधरी को प्रमोशन देकर एसीपी (ASP) बनाया गया है। प्रमोशन के बाद उन्होंने वृंदावन स्थित केली कुंज आश्रम पहुंचकर प्रेमानंद आचार्य महाराज से आशीर्वाद लिया।
पूछा ये सवाल
इस मुलाकात के दौरान अनुज चौधरी ने महाराज से एक बेहद संवेदनशील सवाल पूछा — “कई बार निर्दोष लोगों को सजा मिल जाती है जबकि असली अपराधी बच निकलते हैं, ऐसे में पुलिस अधिकारी क्या करे?”
इस पर प्रेमानंद महाराज ने उन्हें समझाया कि अदालत और पुलिस साक्ष्यों के आधार पर कार्य करते हैं। कोई अधिकारी अंतर्यामी नहीं होता कि पर्दे के पीछे क्या हुआ, यह जान सके। ऐसे में जो रिपोर्ट और सबूत सामने हैं, उसी आधार पर कार्यवाही करनी होती है। उन्होंने कहा कि यह संभव है कि किसी निर्दोष को वर्तमान में सजा मिल जाए, लेकिन यह उसके पूर्व जन्मों के कर्मों का फल हो सकता है।
प्रेमानंद महाराज ने यह भी कहा कि जब तक उस व्यक्ति की कर्मों की सजा पूरी नहीं होती, तब तक सच्चाई भी सामने नहीं आती। लेकिन अगर अधिकारी निष्पक्ष और सबूतों के अनुसार कार्य करते हैं, तो उन पर कोई दोष नहीं लगता। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि अगर कोई अधिकारी धन लेकर, रिश्वत के आधार पर किसी निर्दोष को फंसाता है, तो वह दोषी होगा।
मिला अच्छा संदेश
इस संवाद ने एसीपी अनुज चौधरी को न सिर्फ आध्यात्मिक दृष्टिकोण से संतुलन प्रदान किया, बल्कि उनके जैसे तमाम अधिकारियों के लिए भी एक मूल्यवान मार्गदर्शन प्रस्तुत किया कि कैसे सच्चाई और न्याय के बीच संतुलन बनाए रखें।