600 करोड़ जीएसटी घोटाले की जांच तेज, यूपी में पांच IPS अफसरों की राज्यस्तरीय SIT बनी

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मुरादाबाद में सामने आई 600 करोड़ रुपये से अधिक की जीएसटी चोरी के मामलों ने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी है। इसी गंभीरता को देखते हुए डीजीपी राजीव कृष्ण ने पांच वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की एक राज्यस्तरीय एसआईटी गठित कर दी है, जो अब यूपी के 45 जिलों में दर्ज 147 जीएसटी फर्जीवाड़ा मामलों की सुपरविजन करेगी। यह पहली बार है जब इतनी बड़ी टैक्स चोरी की जांच को केंद्रीकृत कर उच्च स्तरीय मॉनिटरिंग की जा रही है।

ये टीम करेगी जांच

राज्यस्तरीय एसआईटी की कमान आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के आईजी सुनील मेनुएल को सौंपी गई है। उनकी टीम में आईपीएस सुशील घुले चंद्रभान, अविनाश पांडेय, बबिता सिंह और प्रेम कुमार शुक्ला शामिल हैं। शनिवार को लखनऊ स्थित मुख्यालय से इन अफसरों ने प्रदेशभर में बनी जिला स्तरीय एसआईटी टीमों के साथ ऑनलाइन बैठक की, जो करीब ढाई घंटे चली।

बैठक में सभी जिलों को निर्देश दिया गया कि एक सप्ताह के भीतर अपने-अपने केसों से जुड़े मूल रिकॉर्ड, दस्तावेज, जब्ती, संदिग्ध फर्मों की डिटेल और अब तक की जांच की रिपोर्ट लखनऊ भेजी जाए।

सूत्रों के अनुसार आगे की कार्रवाई पूरी तरह राज्यस्तरीय एसआईटी की रणनीति पर आधारित होगी। जिलों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि किसी भी गिरफ्तारी, हिरासत, पूछताछ या चार्जशीट दाखिल करने से पहले लखनऊ की टीम से सहमति लेनी होगी। इस कदम का उद्देश्य जांच को एक दिशा में रखना और टैक्स चोरी के नेटवर्क को विस्तार से समझकर पूरी चेन का पर्दाफाश करना है।

अब तक हुआ ये खुलासा 

मुरादाबाद में पकड़े गए दो ट्रकों से शुरू हुए इस खुलासे में अब तक 122 फर्जी फर्मों के जरिए 600 करोड़ से ज्यादा की चोरी सामने आ चुकी है। लगातार बढ़ते केसों और फर्जी रजिस्ट्रेशन के नेटवर्क ने जांच एजेंसियों को सतर्क कर दिया है।

जिला स्तर की एसआईटी आगे भी साक्ष्य जुटाती रहेगी, जबकि राज्यस्तरीय टीम पूरे ऑपरेशन की निगरानी और अंतिम कार्रवाई तय करेगी। यह कार्रवाई प्रदेश में अब तक की सबसे बड़ी जीएसटी धोखाधड़ी जांचों में से एक मानी जा रही है।

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