अखिलेश दुबे केस: पुलिसकर्मियों की भूमिका उजागर, चार इंस्पेक्टर और दो दारोगा निलंबित

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कानपुर। भूमाफिया और रंगदारी के मामलों में गिरफ्तार चर्चित अधिवक्ता अखिलेश दुबे के गिरोह से जुड़ी जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे उसके पीछे की संरचना उजागर होती जा रही है। अब इस नेटवर्क में शामिल पुलिसकर्मियों की भूमिका सामने आने पर कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार इंस्पेक्टर और दो उपनिरीक्षकों को निलंबित कर दिया है।

शनिवार को हुई कार्रवाई

कमिश्नरेट पुलिस द्वारा शनिवार को जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि इन सभी पुलिसकर्मियों पर अखिलेश दुबे और उसके गिरोह से सांठगांठ कर उन्हें संरक्षण देने, जानबूझकर लापरवाही बरतने, मुकदमों में राहत पहुंचाने और उच्चाधिकारियों को गुमराह करने जैसे गंभीर आरोप हैं। इनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं।

इंस्पेक्टर मानवेंद्र सिंह (तत्कालीन पनकी थाना प्रभारी): आरोप है कि भूमि विवाद से जुड़ी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई और अखिलेश दुबे को लाभ पहुंचाया गया।
इंस्पेक्टर आशीष द्विवेदी (पूर्व में नवाबगंज व फजलगंज में तैनात): इनकी अखिलेश दुबे गिरोह से साठगांठ की पुष्टि हुई है।
इंस्पेक्टर अमान सिंह (तत्कालीन ग्वालटोली थाने में): आरोप है कि उन्होंने गैंग के सदस्यों को लाभ देने के लिए कोर्ट में जमानत टिप्पणी भेजी और उच्चाधिकारियों को जानकारी नहीं दी।
इंस्पेक्टर नीरज ओझा (तत्कालीन बर्रा थाना प्रभारी): इन पर पीड़ित के खिलाफ झूठे आरोप गढ़ने का आरोप है।
उपनिरीक्षक सनोज पटेल – मुकदमों में गैंग के सदस्यों को लाभ पहुंचाने और कोर्ट में गलत रिपोर्ट भेजने के मामले में निलंबित किए गए।
उपनिरीक्षक आदेश यादव (नौबस्ता के आवास विकास चौकी प्रभारी): स्थानीय जनता और स्टाफ से खराब व्यवहार, गलत गतिविधियों में लिप्तता और विभाग की छवि धूमिल करने के कारण कार्रवाई हुई।

ऑपरेशन महाकाल 2 के तहत हुई कार्रवाई

इस कार्रवाई के पीछे “ऑपरेशन महाकाल 2” के तहत की जा रही जांच को कारण बताया गया है, जिसमें सरकारी कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों की संलिप्तता की गोपनीय जांच की जा रही थी। पुलिस आयुक्त अखिल कुमार ने पहले ही स्वीकार किया था कि अखिलेश दुबे को वकीलों, पत्रकारों, नेताओं और पुलिस अधिकारियों से संरक्षण प्राप्त था।

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