मेरठ जिले की पुलिस फोर्स में एक सख्त और चौंकाने वाली कार्रवाई हुई। एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के मामलों पर जीरो टॉलरेंस दिखाते हुए 21 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया। सूची में 4 उपनिरीक्षक, ट्रैफिक पुलिस के कई जवान और परतापुर थाने के पुलिसकर्मी शामिल हैं।
इस मामले में हुई कार्रवाई
पिछले कुछ समय से ट्रैफिक पुलिस पर बाहरी वाहनों को रोककर वसूली करने के आरोप तेजी से बढ़ रहे थे। आम नागरिकों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक ने मंचों पर इस पर नाराज़गी जताई थी। रिपोर्ट के अनुसार, कई पुलिसकर्मी वरिष्ठ अधिकारियों के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद सड़क पर मनमानी करते रहे—बाहरी नंबर की गाड़ियों को रोकना, बेवजह चालान करना और विरोध होने पर कानूनी कार्रवाई की धमकी देना आम हो गया था।
ट्रैफिक पुलिस के साथ-साथ परतापुर थाने के कुछ पुलिसकर्मियों पर भी गंभीर आरोप थे। जनता से बदसलूकी, काम में लापरवाही और गुपचुप लेन-देन जैसी शिकायतें विभाग तक पहुंच चुकी थीं। इन आरोपों की पुष्टि होने पर ट्रैफिक पुलिस के चार टीएसआई, एक हेड कांस्टेबल और पांच कांस्टेबल को लाइन भेज दिया गया।
वहीं, परतापुर थाने में भी लंबे समय से पुलिसकर्मियों की कार्यशैली को लेकर शिकायतें आ रही थीं। आंतरिक जांच और एएसपी की रिपोर्ट के बाद छह हेड कांस्टेबल और पांच कांस्टेबल को भी लाइन हाजिर कर दिया गया।
संदेश साफ — मनमानी बर्दाश्त नहीं
एक ही आदेश में 21 लोगों पर गिरी गाज ने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। वरिष्ठ अफसरों का मानना है कि यह कदम फोर्स के भीतर अनुशासन बहाल करने और जनता का भरोसा वापस जीतने की दिशा में एक सख्त संदेश है—अब मनमानी और वसूली की कोई गुंजाइश नहीं होगी।