शामली में अपराधियों के साथ हुई मुठभेड़ में अदम्य साहस दिखाते हुए शहीद हुए एसटीएफ इंस्पेक्टर सुनील कुमार को मरणोपरांत राष्ट्रपति वीरता पदक से सम्मानित किया जाएगा। देश सेवा के दौरान उनके सर्वोच्च बलिदान और बहादुरी को देखते हुए उनका नाम सम्मान पाने वाले पुलिसकर्मियों की सूची में प्रमुखता से शामिल किया गया है। यह पदक उनके साहस, कर्तव्यनिष्ठा और पुलिस सेवा के प्रति समर्पण को श्रद्धांजलि है।
किस टीम का हिस्सा थे सुनील कुमार
इंस्पेक्टर सुनील कुमार शामली में एसटीएफ की उस टीम का हिस्सा थे, जिसने एक लाख रुपये के इनामी अपराधी अरशद और उसके साथियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। रात हुई मुठभेड़ में दोनों ओर से जमकर गोलीबारी हुई। इसी दौरान सुनील कुमार को कई गोलियां लगीं और वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए गुरुग्राम के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां जिंदगी और मौत के बीच जूझते हुए उन्होंने दम तोड़ दिया।
1990 में हुए थे भर्ती
1971 में जन्मे सुनील कुमार मूल रूप से मेरठ के रहने वाले थे। वर्ष 1990 में उन्होंने पुलिस सेवा में कदम रखा और लंबे समय तक पीएसी में सेवाएं दीं। वर्ष 2009 में वह एसटीएफ में शामिल हुए। अपने करीब तीन दशक लंबे करियर में उन्होंने कई खतरनाक अपराधियों के खिलाफ अभियानों में हिस्सा लिया और साहस का परिचय दिया।
सुनील कुमार को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए कई सम्मान मिल चुके थे। वर्ष 2015 में सराहनीय सेवा सम्मान चिन्ह, 2022 में उत्कृष्ट सेवा सम्मान चिन्ह और 2024 में अति उत्कृष्ट सेवा पदक एवं प्रशंसा चिन्ह-रजत से उन्हें सम्मानित किया गया था। उनका पूरा सेवा जीवन अपराध के खिलाफ लड़ाई और कर्तव्य के प्रति समर्पण की मिसाल रहा। अब मरणोपरांत राष्ट्रपति वीरता पदक उनके बलिदान को देश की ओर से सलाम होगा।