बकरीद 2026: संभल से वाराणसी तक पुलिस-प्रशासन सतर्क, ड्रोन से रखी जा रही नजर

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उत्तर प्रदेश में बकरीद (ईद-उल-अजहा) को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए पुलिस-प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। राज्य के संभल, मुजफ्फरनगर, चंदौली, मेरठ, सहारनपुर, अयोध्या, आजमगढ़ और वाराणसी सहित सभी संवेदनशील जिलों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। शासन के निर्देशों के अनुसार सार्वजनिक स्थानों पर नमाज अदा करने और खुले में कुर्बानी करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है, जिसके अनुपालन को सुनिश्चित कराने के लिए भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है।

हो रही चेकिंग

संवेदनशील जिलों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने फ्लैग मार्च, पैदल गश्त और क्षेत्रीय निरीक्षण तेज कर दिया है। संभल जिले में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करते हुए पूरे क्षेत्र को पांच जोन और 18 सेक्टर में विभाजित किया गया है, जहां पीएसी, आरआरएफ और स्थानीय पुलिस बल को तैनात किया गया है। यहां सीसीटीवी कैमरों और इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही है।

मेरठ और सहारनपुर में भी पुलिस अधिकारियों ने भीड़भाड़ वाले बाजारों और प्रमुख स्थानों पर पैदल मार्च कर लोगों को सुरक्षा का भरोसा दिलाया है। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के साथ-साथ सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल को भी सक्रिय किया गया है ताकि अफवाह फैलाने वालों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

चंदौली में पीस कमेटी की बैठकों के बाद सभी थाना क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। वहीं मुजफ्फरनगर में लगभग डेढ़ हजार पुलिसकर्मी तैनात कर जोनल और सेक्टर व्यवस्था लागू की गई है। यहां ड्रोन कैमरों से मस्जिदों और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो।

इन जिलों में भी रखी जा रही सावधानी

अयोध्या और आजमगढ़ में भी चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात हैं और ईदगाहों व मस्जिदों में ही निर्धारित समय पर नमाज कराने के निर्देश दिए गए हैं। वाराणसी में भी फ्लैग मार्च और ड्रोन निगरानी के जरिए कानून व्यवस्था को मजबूत किया गया है।

राजधानी लखनऊ में भी पुलिस अलर्ट पर है और ईदगाह में निर्धारित समय पर ही नमाज की अनुमति दी गई है। प्रशासन ने साफ किया है कि प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी और सड़कों पर नमाज की अनुमति किसी भी हाल में नहीं दी जाएगी।

पूरे प्रदेश में प्रशासन का फोकस त्योहार को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न कराने पर है, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके और सामाजिक समरसता बनी रहे।

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