उत्तर प्रदेश में एक बार फिर महिला सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जब कानून व्यवस्था संभालने वाली महिला पुलिसकर्मी ही खुद को असुरक्षित महसूस करे, तो आम महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता स्वाभाविक है। ताजा मामला बस्ती जिले का है, जहां एक महिला कॉन्स्टेबल ने अपने ही थाना प्रभारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस घटना ने पुलिस महकमे की कार्यशैली और आंतरिक माहौल पर बहस छेड़ दी है।
ये है मामला
सदर कोतवाली में तैनात 2019 बैच की कॉन्स्टेबल मेनका चौहान ने आरोप लगाया है कि छुट्टी मांगने पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। उनका कहना है कि वह अपनी बीमार मां के इलाज के लिए एक दिन की छुट्टी चाहती थीं, लेकिन थाना प्रभारी ने न केवल छुट्टी देने से इनकार किया बल्कि अशोभनीय टिप्पणियां भी कीं। महिला कॉन्स्टेबल के मुताबिक, उनसे निजी नंबर पर बात करने और “जीजा” कहकर संबोधित करने का दबाव बनाया जाता था। जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ।
मेनका चौहान रोते हुए डीआईजी बस्ती रेंज संजीव त्यागी के कार्यालय पहुंचीं और पूरी घटना की शिकायत की। उनका आरोप है कि उन्हें ड्यूटी पर अनुपस्थित दिखाया गया और उच्च अधिकारियों से मिलने से भी रोकने की कोशिश की गई। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी टिप्पणियां केवल उनके साथ ही नहीं, बल्कि अन्य महिला कर्मियों के साथ भी की जाती हैं, लेकिन कार्रवाई के डर से ज्यादातर चुप रहती हैं।
शुरू हुई जांच
दूसरी ओर, इंस्पेक्टर दिनेश चंद्र चौधरी ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि कॉन्स्टेबल लंबी छुट्टी की मांग कर रही थीं, जिसे तत्काल मंजूर करना संभव नहीं था। छुट्टी विवाद को लेकर ही यह आरोप लगाए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक की ओर से दो सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है, जिसमें एएसपी और क्षेत्राधिकारी शामिल हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।