सुप्रीम कोर्ट ने बस्ती के डीआईजी संजीव त्यागी को आदेश दिया है कि वे 9 मार्च 2026 को हैदराबाद की फॉरेंसिक लैब में अपना ऑडियो सैंपल दें। यह आदेश उस मामले में दिया गया है जिसमें त्यागी, जो पहले बिजनौर में एसपी थे, ने मुस्लिम समुदाय के खिलाफ विवादास्पद टिप्पणियां की थीं। इस केस में इस्लामुद्दीन अंसारी वादी हैं, जिन्होंने पुलिस अधिकारी के खिलाफ आरोप लगाया कि त्यागी ने एक ऑडियो क्लिप के माध्यम से समुदाय में भड़काऊ बयान दिए। इस मामले की जांच में कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं और इसे उचित तरीके से निपटाने का आदेश दिया है।
ये है मामला
यह मामला उस समय सामने आया जब इस्लामुद्दीन अंसारी ने पुलिस अधिकारी संजीव त्यागी के खिलाफ उनके मुस्लिम विरोधी बयान को लेकर सवाल उठाए थे। अंसारी के अनुसार, त्यागी ने एक ऑडियो क्लिप में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी, जिसे अंसारी ने सिर्फ एसपी को भेजा था, लेकिन यह क्लिप बाद में वायरल हो गई। अंसारी ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ पुलिस ने झूठा मामला दर्ज किया था, केवल इसलिए क्योंकि उन्होंने पुलिस अधिकारी के खिलाफ सवाल उठाए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि पुलिस अधिकारियों ने अंसारी के खिलाफ पूरी तरह से शक्ति का दुरुपयोग किया। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर भविष्य में किसी भी अधिकारी ने अंसारी को परेशान करने की कोशिश की, तो वह सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। साथ ही, कोर्ट ने आदेश दिया कि संजीव त्यागी की आवाज का सैंपल तेलंगाना की फॉरेंसिक लैब में लिया जाए, और यह सुनिश्चित किया जाए कि यह जांच पूरी पारदर्शिता के साथ हो।
कोर्ट ने दिया आदेश
कोर्ट ने संजीव त्यागी को निर्देश दिया कि वे 9 मार्च 2026 को हैदराबाद की फॉरेंसिक लैब में जाकर अपना ऑडियो सैंपल दें। रिपोर्ट को 31 जनवरी 2026 तक सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को भेजने का निर्देश भी दिया गया है। इस मामले की अगली सुनवाई 12 जनवरी 2026 को होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि त्यागी ने जांच में सहयोग नहीं किया, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।