संभल हिंसा मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से पुलिस अधिकारियों को अंतरिम राहत मिली है। हाईकोर्ट ने संभल की सीजेएम कोर्ट द्वारा तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी समेत अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह आदेश जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुई हिंसा और गोलीबारी के आरोपों से जुड़े मामले में दिया गया है।
इस मामले में जारी हुआ था आदेश
यह मामला संभल निवासी यामीन की याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि 24 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद सर्वे के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने भीड़ पर गोली चलाई। यामीन का दावा है कि उनका बेटा आलम उस समय ठेला लेकर घर लौट रहा था और भागने की कोशिश के दौरान पुलिस की गोली लगने से वह घायल हो गया। इसी आधार पर यामीन ने अनुज चौधरी समेत 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी, जिसे सीजेएम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था।
सीजेएम कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए अनुज चौधरी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ कर रही है। सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि घायल युवक के शरीर से जो गोली बरामद हुई है, वह उस बोर की है, जिसे उत्तर प्रदेश पुलिस इस्तेमाल नहीं करती। आगरा स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकार ने पुलिस पर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया।
अपर महाधिवक्ता ने कहा ये
अपर महाधिवक्ता ने यह भी दलील दी कि सीजेएम कोर्ट ने बीएनएसएस की धारा 175 के तहत निर्धारित अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया। उन्होंने बताया कि किसी लोकसेवक के खिलाफ एफआईआर का आदेश देने से पहले वरिष्ठ अधिकारियों की रिपोर्ट और घटना की परिस्थितियों पर संबंधित अधिकारी के पक्ष को सुनना जरूरी होता है।
हाईकोर्ट ने इन दलीलों को ध्यान में रखते हुए एफआईआर के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। मामले में मंगलवार को प्रतिवादी पक्ष की ओर से दलीलें पेश की जानी हैं। फिलहाल यह आदेश पुलिस अधिकारियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।