तनाव में आए फरियादियों को मिलेगा सम्मान, पुलिस विभाग में पुलिसकर्मियों के व्यवहार सुधार पर जोर

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थाने में आने वाला हर फरियादी किसी न किसी मानसिक तनाव, डर या परेशानी के साथ आता है। ऐसे में अगर पुलिस का व्यवहार सहयोगी और सम्मानजनक हो, तो न सिर्फ उसकी हिम्मत बढ़ती है बल्कि पुलिस पर जनता का भरोसा भी मजबूत होता है। इसी सोच के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस अब अपने व्यवहार में बदलाव पर विशेष फोकस कर रही है और संवेदनशील पुलिसिंग की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।

इसलिए लिया गया फैसला 

उत्तर प्रदेश पुलिस ने तय किया है कि थाने, चौकी और अन्य पुलिस कार्यालयों में तैनात कर्मियों के व्यवहार को और अधिक मानवीय व संवेदनशील बनाया जाएगा। पुलिस मुख्यालय स्तर पर यह माना गया है कि कानून का पालन कराना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी फरियादी की बात ध्यान से सुनना और उसकी समस्या को समझना भी है। थाने में आने वाला हर फरियादी तनाव में होता है और ऐसे में पुलिस का सम्मानजनक व सहयोगी व्यवहार उसकी हिम्मत बढ़ाने का काम करता है।

इसी उद्देश्य से पुलिस कर्मियों के व्यवहार में बदलाव लाने के लिए विशेष ट्रेनिंग की योजना बनाई गई है। चयनित इंस्पेक्टरों और क्षेत्राधिकारियों (सीओ) को डॉ. बीआर आंबेडकर पुलिस अकादमी में संवेदनशीलता और व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। ट्रेनिंग प्राप्त करने के बाद ये अधिकारी अपने-अपने जिलों में जाकर अन्य पुलिस कर्मियों के साथ अपने अनुभव साझा करेंगे, जिससे जिले स्तर पर भी व्यवहार में सुधार हो सके।

मिलेगी जनता को मदद

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि फरियादी को “सर” कहकर संबोधित करना, उसे बैठने के लिए कुर्सी देना और उसकी शिकायत को धैर्यपूर्वक सुनना जैसे छोटे कदम भी पुलिस की छवि बदलने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इससे फरियादी खुद को अपमानित या अनसुना महसूस नहीं करेगा और निडर होकर अपनी बात रख पाएगा।

यह ट्रेनिंग चरणबद्ध तरीके से कराई जाएगी, ताकि धीरे-धीरे पूरे प्रदेश में संवेदनशील और सम्मानजनक पुलिसिंग की संस्कृति विकसित हो सके। अधिकारियों का कहना है कि इस पहल से पुलिस और आम जनता के बीच विश्वास का रिश्ता मजबूत होगा और न्याय प्रक्रिया को भी मजबूती मिलेगी।

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