यह मामला उत्तर प्रदेश पुलिस के एक सिपाही पर दर्ज दुष्कर्म और अपहरण के आरोपों से जुड़ा है, जिसकी जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) करेगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद यह साफ हो गया है कि फिरोजाबाद, आगरा और मथुरा में दर्ज सिपाही दीपेंद्र सिंह और उसके परिजनों के खिलाफ करीब छह मुकदमों की निष्पक्ष जांच अब सीबीआई के हवाले होगी। इस आदेश का सबसे अहम पहलू यह है कि जांच के दायरे में 33 पुलिसकर्मियों की भूमिका भी आएगी, जिनसे सीबीआई बयान दर्ज करेगी।
ये था मामला
मामला 24 मार्च 2022 का है, जब फिरोजाबाद के रसूलपुर थाना क्षेत्र से एक 16 वर्षीय किशोरी के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। बाद में किशोरी आगरा से बरामद की गई। उसने आरोप लगाया कि आगरा जीआरपी में तैनात सिपाही दीपेंद्र सिंह ने उसे बहला-फुसलाकर अगवा किया और मथुरा के एक होटल में उसके साथ दुष्कर्म किया। मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया और दीपेंद्र के भाई व मां को भी आरोपी बनाया गया।
पीड़िता के परिवार ने स्थानीय पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिसके बाद विवेचना क्राइम ब्रांच आगरा को सौंप दी गई। इसी बीच आरोपी पक्ष ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दावा किया कि उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे पुलिस की रंजिश और साजिश का नतीजा हैं। याचिका में 2018 में कथित फर्जी मामलों और पुलिसकर्मियों की भूमिका का भी जिक्र किया गया था।
33 पुलिसकर्मियों की बढ़ेंगी मुश्किल
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद यह माना कि मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सीबीआई जांच जरूरी है। अब सीबीआई न केवल दुष्कर्म और अपहरण के मामले की जांच करेगी, बल्कि यह भी देखेगी कि क्या पुलिसकर्मियों ने अपने पद का दुरुपयोग किया। इस फैसले से जहां पीड़िता को न्याय की उम्मीद बंधी है, वहीं 33 पुलिसकर्मियों की मुश्किलें भी बढ़ती नजर आ रही हैं।