उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में भ्रष्टाचार के एक गंभीर मामले में पुलिस विभाग की छवि को झटका लगा है। जांच के नाम पर रिश्वत लेने के आरोप में एक पुलिस उपनिरीक्षक को न केवल निलंबित कर दिया गया है, बल्कि उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी भी दर्ज की गई है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर की गई, जिससे विभाग में सख्त संदेश देने की कोशिश की गई है कि भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ये है मामला
मामला बांसडीह रोड थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां तैनात उपनिरीक्षक रमाशंकर यादव पर आरोप है कि उन्होंने एक आपराधिक मुकदमे की जांच के दौरान वादी से अवैध धनराशि की मांग की और उसे प्राप्त भी किया। थाना प्रभारी वंश बहादुर सिंह की तहरीर पर शुक्रवार को उपनिरीक्षक के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 13 के तहत नामजद मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने तत्काल प्रभाव से आरोपी दरोगा को निलंबित कर दिया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जिस मामले की जांच उपनिरीक्षक कर रहे थे, उसमें आरोपी जैनेन्द्र पाल के विरुद्ध पहले से मुकदमा दर्ज था। जांच के दौरान उपनिरीक्षक ने कथित तौर पर मुकदमे के वादी से अनुचित लाभ लिया।
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई कि आरोपी दरोगा ने कुल 17 हजार रुपये रिश्वत के रूप में प्राप्त किए थे, हालांकि बाद में उसने इसमें से 10 हजार रुपये वापस भी कर दिए। बावजूद इसके, रिश्वत लेने की पुष्टि होने पर विभाग ने कड़ी कार्रवाई करते हुए निलंबन का फैसला लिया।
एएसपी ने दी जानकारी
अपर पुलिस अधीक्षक (उत्तरी) दिनेश कुमार शुक्ला ने बताया कि मामले की प्रारंभिक जांच पूरी कर ली गई है और इसमें उपनिरीक्षक की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निलंबन केवल प्रारंभिक कार्रवाई है और आगे की विभागीय व कानूनी जांच जारी रहेगी। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो आरोपी के खिलाफ और भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।