यूपी पुलिस में बीते कुछ सालों में हुए प्रमोशन और रिटायरमेंट ने अफसरों के कैडर स्ट्रक्चर को पूरी तरह असंतुलित कर दिया है। हालत यह है कि जहां एडीजी और डीआईजी रैंक पर अफसर जरूरत से कहीं ज्यादा हो गए हैं, वहीं आईजी रैंक पर सबसे ज्यादा कमी सामने आ रही है। आने वाले समय में यह असंतुलन और गहराने के संकेत हैं।
एडीजी: पद कम, अफसर ज्यादा
यूपी पुलिस में एडीजी के कुल स्वीकृत पद सिर्फ 21 हैं, लेकिन इस समय 36 अफसर एडीजी रैंक में मौजूद हैं। इसके अलावा चार एडीजी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भी हैं।
स्थिति इतनी उलझी हुई है कि कई जगह एडीजी कैडर पोस्ट पर डीजी स्तर के अफसर तैनात हैं, जबकि कुछ एडीजी पदों पर आईजी स्तर के अफसर काम संभाल रहे हैं।
* 112 यूपी की एडीजी पोस्ट पर डीजी नीरा रावत
* एडीजी कार्मिक की पोस्ट पर आईजी स्तर का अफसर
* टेलीकॉम और अन्य एडीजी कैडर पोस्ट पर भी डीजी की तैनाती
इससे साफ है कि एडीजी स्तर पर कैडर प्लानिंग पूरी तरह गड़बड़ा चुकी है।
आईजी: सिस्टम की सबसे कमजोर कड़ी
आईजी रैंक इस समय यूपी पुलिस की सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है।जहां आईजी के 51 स्वीकृत पद हैं, वहीं सिर्फ 33 अफसर ही उपलब्ध हैं। हाल ही में 2008 बैच के कुछ अफसर प्रमोट जरूर हुए हैं, लेकिन उससे अंतर ज्यादा नहीं पटा।
नतीजा यह है कि—
* यूपी की 18 रेंजों में से ज्यादातर में आईजी कैडर पोस्ट पर डीआईजी तैनात हैं
* रेंज स्तर पर निर्णय क्षमता और प्रशासनिक संतुलन प्रभावित हो रहा है
आईजी की कमी सीधे तौर पर फील्ड मैनेजमेंट पर असर डाल रही है।
डीआईजी: सबसे तेज़ी से बढ़ता रैंक
2012 बैच के प्रमोशन के बाद डीआईजी रैंक में अफसरों की संख्या 66 हो गई है, जबकि पद सिर्फ 51 हैं।
यानि डीआईजी स्तर पर भी अब सरप्लस अफसरों की स्थिति बन चुकी है।
सूत्रों के मुताबिक
* बड़े जिलों में एसएसपी पद पर डीआईजी रैंक के अफसरों की तैनाती की तैयारी
* कुछ बड़ी रेंजों में आईजी की जगह डीआईजी को चार्ज दिया जा सकता है
2027 के बाद और बिगड़ेगा संतुलन
जानकारों का मानना है कि 2027 में होने वाले अगले प्रमोशन के बाद डीआईजी रैंक पर अफसरों की संख्या और बढ़ेगी। अगर कैडर रिव्यू और पोस्ट री-स्ट्रक्चरिंग नहीं हुई, तो—
* आईजी रैंक और कमजोर होगी
* एडीजी व डीआईजी में प्रतिस्पर्धा और असंतोष बढ़ेगा