उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में बड़े पैमाने पर हुए प्रमोशन को एक महीना 20 दिन से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन अब तक सीनियर अफसरों को नई तैनाती नहीं मिल सकी है। हालात यह हैं कि आईजी, डीआईजी और एडीजी रैंक के कई अफसर अब भी पुराने पदों पर ही काम कर रहे हैं। कहीं एडीजी की कुर्सी पर डीजी बैठे हैं, तो कई जिलों के एसएसपी प्रमोशन के बाद डीआईजी बन चुके हैं, लेकिन अब भी जिले की कमान संभाले हुए हैं।
ये अफसर कर रहे इंतजार
डीजी रैंक के अफसर सुजीत पांडेय प्रमोशन के बाद भी एडीजी पद पर तैनात हैं। वहीं, 1990 बैच की आईपीएस रेणुका मिश्रा लंबे समय से बिना ठोस जिम्मेदारी के डीजीपी मुख्यालय से अटैच हैं। उनके समय में हुए भर्ती पेपर लीक का खामियाजा उन्हें अब तक भुगतना पड़ रहा है।
एक तरफ कई अफसरों के पास कोई स्पष्ट काम नहीं है, तो दूसरी ओर कई सीनियर अफसर दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। डीजीपी राजीव कृष्ण के पास विजिलेंस का अतिरिक्त प्रभार है। इसी तरह बीके सिंह, नीरा रावत, डीके ठाकुर और अमिताभ यश जैसे अफसर एक से ज्यादा अहम विभाग संभाल रहे हैं। यह असंतुलन सिस्टम पर सवाल खड़े करता है।
इसके अलावा कुछ अफसर लंबे समय से एक ही पोस्ट पर जमे हैं। नोएडा की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह करीब साढ़े तीन साल से एक ही पद पर हैं, जबकि उनका प्रमोशन भी हो चुका है। इस साल प्रमोशन पाने वाले कई आईजी, डीआईजी और डीसीपी भी नई तैनाती का इंतजार कर रहे हैं।
इसलिए नहीं हो पा रहा तबादला
जानकारों के मुताबिक, अफसरों की आपसी खींचतान और पसंद-नापसंद के चलते तबादले अटके हुए हैं। पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह का कहना है कि सरकार को निष्पक्ष रहते हुए संतुलित तैनाती करनी चाहिए, ताकि किसी के पास दो-दो चार्ज न हों और कोई अफसर बिना काम के न रहे।