उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक महकमे की बड़ी तबादला सूची का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है। इस देरी को लेकर अफसरों के बीच चर्चाओं का दौर तेज है, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आखिर तबादला सूची किस वजह से अटकी हुई है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार के शीर्ष स्तर पर कुछ अहम पदों पर तैनाती को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है, जिस कारण पूरी प्रक्रिया रुकी हुई है।
इसको लेकर मतभेद
चर्चा है कि सूबे के मुखिया के जिले के साथ-साथ दो बड़े जिलों में किस अधिकारी को तैनात किया जाए, इस मुद्दे पर वरिष्ठ अधिकारियों के बीच मतभेद हैं। इन जिलों को प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है, इसलिए यहां तैनाती को लेकर हर फैसला काफी सोच-समझकर लिया जा रहा है। लेकिन इसी कारण पूरी तबादला सूची अटक गई है।
इसके अलावा डीजी स्तर के एक अधिकारी की कुर्सी को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। बताया जा रहा है कि डीजी स्तर की लगभग सभी महत्वपूर्ण कुर्सियों पर पहले से ही किसी न किसी डीजी की तैनाती हो चुकी है। हालांकि एक अहम पद अभी भी खाली है, लेकिन उस पर एडीजी का कब्जा बना हुआ है। लाख कोशिशों के बावजूद अब तक कोई डीजी उस एडीजी के खिलाफ खुलकर सामने नहीं आया है।
जनवरी के पहले सप्ताह में आई थी लिस्ट
सूत्रों के अनुसार डीजी रैंक की एक खाली कुर्सी पर डीजी को बैठाने की तैयारी थी, लेकिन जनवरी के पहले सप्ताह में आई सूची में वहां किसी और अधिकारी को तैनात कर दिया गया। इससे कई वरिष्ठ अधिकारी असमंजस में हैं और वे अब यह इंतजार कर रहे हैं कि पावर सेंटर वाली कुर्सियों पर आखिर किसकी फायर पावर काम करेगी।
कुल मिलाकर तबादला सूची को लेकर अफसरों में बेचैनी बढ़ती जा रही है और हर कोई यह जानने को उत्सुक है कि आखिर यह इंतजार कब खत्म होगा और किसे कहां जिम्मेदारी सौंपी जाएगी