कानपुर में 14 वर्षीय लड़की के अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस के रवैये पर सवाल उठते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने यूपी पुलिस के प्रमुख, राजीव कृष्ण (डीजीपी) को नोटिस जारी किया है। एनएचआरसी ने पुलिस के असंवेदनशील रवैये और आरोपी पुलिसकर्मी की गिरफ्तारी में हो रही देरी के कारण राज्य पुलिस के प्रमुख से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
ये था मामला
मामला 5 जनवरी को हुई घटना का है, जब एक स्थानीय पत्रकार शिवबरन यादव और बिठूर थाना के एसआई अमित कुमार मौर्य ने मिलकर एक 14 वर्षीय लड़की का अपहरण किया और उसे एक सुनसान स्थान पर ले जाकर दो घंटे तक उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता के बयान और पहचान के बावजूद पुलिस ने अब तक आरोपी एसआई मौर्य की गिरफ्तारी नहीं की है, जिससे आम जनता और पीड़िता के परिवार में गहरी निराशा और आक्रोश है।
एनएचआरसी ने इस मामले पर गंभीर चिंता व्यक्त की है, क्योंकि यदि यह घटना सत्य है, तो यह मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है। आयोग ने डीजीपी राजीव कृष्ण को दो सप्ताह के भीतर इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा है।
इससे पहले, पुलिस ने जांच के दौरान आरोपियों के खिलाफ मामूली कार्रवाई की थी, जिससे यह मामला और जटिल हो गया। पीड़िता के परिवार ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने मामले को दबाने की कोशिश की और घटनाओं को सही तरीके से पेश नहीं किया।
की गई कड़ी कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए, पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। पनकी के सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) शिखर को रिजर्व पुलिस लाइंस से संबद्ध कर दिया गया, जबकि भीमसेन पुलिस चौकी प्रभारी दिनेश कुमार को निलंबित कर दिया गया। फिलहाल एनएचआरसी की ओर से नोटिस जारी करने के बाद दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।