बरेली में पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला एक गंभीर मामला सामने आने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य ने सख्त कदम उठाए हैं। जोगी नवादा गोलीकांड के आरोपी सौरभ राठौर का आपराधिक रिकॉर्ड जानबूझकर छिपाकर पासपोर्ट बनवाने के प्रकरण में बारादरी थाने में तैनात दारोगा रोहित शर्मा और सिपाही दीपक तोमर को दोषी पाया गया है। दोनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करते हुए सात दिन के वेतन के बराबर अर्थदंड लगाया गया है।
ये था मामला
मामले की जांच में यह तथ्य सामने आया कि सौरभ राठौर के खिलाफ बारादरी थाने में जानलेवा हमला, दंगा, आर्म्स एक्ट सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। इसके बावजूद जब उसने पासपोर्ट के लिए आवेदन किया, तो संबंधित पुलिसकर्मियों ने उसके आपराधिक इतिहास को छिपाते हुए भ्रामक रिपोर्ट लगा दी।
रिपोर्ट में केवल उसी मुकदमे का उल्लेख किया गया, जिसमें आरोपी को कोर्ट से राहत मिल चुकी थी, जबकि शेष मामलों की जानकारी जानबूझकर छोड़ दी गई। इसी गलत रिपोर्ट के आधार पर पासपोर्ट कार्यालय ने सौरभ राठौर का पासपोर्ट जारी कर दिया।
इस पूरे मामले की शिकायत जब एसएसपी अनुराग आर्य तक पहुंची, तो उन्होंने तत्काल संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष जांच के आदेश दिए। जांच की जिम्मेदारी एसपी ट्रैफिक को सौंपी गई। जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि दारोगा और सिपाही ने अपने कर्तव्यों का गंभीर उल्लंघन किया है और आरोपी को अनुचित लाभ पहुंचाने की मंशा से तथ्य छिपाए गए। जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद एसएसपी ने कठोर विभागीय कार्रवाई की।
एसएसपी ने की कार्रवाई
एसएसपी अनुराग आर्य ने न केवल दोषी पुलिसकर्मियों को आर्थिक दंड से दंडित किया, बल्कि गलत तरीके से जारी किए गए पासपोर्ट को निरस्त कराने की प्रक्रिया भी शुरू करा दी है। प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही या मिलीभगत सामने आने पर और भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह मामला पुलिस विभाग में पारदर्शिता, जवाबदेही और कानून के प्रति सख्त रुख का स्पष्ट संदेश माना जा रहा है।