संभल हिंसा प्रकरण में अदालत के आदेश के बाद प्रशासन और पुलिस की प्रतिक्रिया ने मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। चंदौसी स्थित अदालत द्वारा तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी, तत्कालीन कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर और अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए जाने के बावजूद पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस आदेश के अनुपालन में फिलहाल कोई एफआईआर दर्ज नहीं करेगी।
एसपी ने कहा ये
संभल के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने साफ शब्दों में कहा है कि अदालत के आदेश के खिलाफ सक्षम न्यायालय में अपील दायर की जाएगी। उनका तर्क है कि इस पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच पहले ही हो चुकी है, ऐसे में दोबारा प्राथमिकी दर्ज करना उचित नहीं है।
एसपी के अनुसार, जब किसी मामले में न्यायिक जांच पूरी हो चुकी हो, तो उसी विषय पर एफआईआर दर्ज करना कानूनी रूप से विवादास्पद हो सकता है। इसी रुख को दोहराते हुए संभल पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से भी यह जानकारी साझा की गई कि अदालत के आदेश को चुनौती दी जाएगी।
ये है मामला
यह आदेश मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी द्वारा एक घायल युवक के पिता की याचिका पर पारित किया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि 24 नवंबर 2024 को हिंसा के दौरान पुलिस फायरिंग में उनके बेटे को गोली लगी। अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले को संज्ञेय मानते हुए प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया। हालांकि, पुलिस का कहना है कि हिंसा से जुड़े पूरे घटनाक्रम की पहले ही न्यायिक पड़ताल हो चुकी है और उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की गई थी।
प्रशासन का यह रुख बताता है कि मामला अब केवल हिंसा या आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक संवैधानिक और कानूनी बहस का रूप ले चुका है। एक ओर अदालत का आदेश है, तो दूसरी ओर पुलिस और प्रशासन की यह दलील कि पहले से हुई न्यायिक जांच के चलते एफआईआर की आवश्यकता नहीं है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि उच्च न्यायालय इस टकराव पर क्या रुख अपनाता है और क्या पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामला आगे बढ़ता है या नहीं।