पुलिस मुख्यालय में मंगलवार को आयोजित ऑनलाइन समीक्षा बैठक में प्रदेश के समस्त जनपदीय वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को पुलिस मंथन–2025 के तहत प्रस्तुत 11 सत्रों के सुझावों के समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए। बैठक की अध्यक्षता पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने की। इस दौरान अपराध नियंत्रण, सड़क सुरक्षा और तकनीक के अधिकतम उपयोग को लेकर विस्तृत समीक्षा की गई और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए।
राज्य में सड़क दुर्घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट अभियान को सभी जिलों में लागू करने का निर्णय लिया गया। डीजीपी ने बताया कि पहले चरण में 20 जिलों के 233 थाना क्षेत्रों को इस अभियान के अंतर्गत शामिल किया गया था, जहां निरंतर निगरानी, प्रवर्तन और जागरूकता के प्रयासों से सड़क दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। अब इस सफल मॉडल को शेष 55 जनपदों में लागू कर सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु दर को कम करने का लक्ष्य रखा गया है।
DGP ने दिए निर्देश
डीजीपी ने सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे पिछले एक वर्ष में हुई सड़क दुर्घटनाओं का विस्तृत अध्ययन कर दुर्घटना संभावित स्थानों यानी ब्लैक स्पॉट्स की पहचान करें। परिवहन विभाग और यातायात पुलिस द्वारा पहले से चिह्नित ब्लैक स्पॉट्स की सूची सभी जिलों को उपलब्ध कराई जाएगी। इन स्थानों पर यातायात नियंत्रण, प्रवर्तन कार्रवाई और अन्य आवश्यक सुधार सुनिश्चित किए जाएंगे, जिससे दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
बैठक में अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया गया। डीजीपी ने स्पष्ट कहा कि अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ निरंतर, परिणामोन्मुख और वैधानिक कार्रवाई की जाए तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। चिन्हित अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई को और तेज करने के निर्देश दिए गए।
महिलाओं की सुरक्षा पर होगा फोकस
महिलाओं की सुरक्षा के लिए मिशन शक्ति केंद्रों को और अधिक संवेदनशील तथा प्रभावी बनाने पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही पुलिस कार्यप्रणाली को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से हाल ही में लॉन्च किए गए यक्ष ऐप के अधिकतम उपयोग के निर्देश दिए गए। संबंधित पुलिस कर्मियों को इस एप के संचालन का प्रशिक्षण देने को कहा गया है। इस एप में ऑपरेशन पहचान, ऑपरेशन त्रिनेत्र और बीट प्रहरी अभियान का डेटा एकीकृत किया गया है।
डीजीपी ने निर्देश दिए कि प्रथम चरण में यक्ष ऐप में दर्ज सभी डेटा की जांच पूरी की जाए। इस एप के माध्यम से पुलिसकर्मी चेहरे और आवाज के आधार पर अपराधियों की पहचान कर सकेंगे, जिससे अपराध नियंत्रण को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। बैठक में यह संदेश स्पष्ट रूप से दिया गया कि अनुशासन, तकनीक और जवाबदेही के जरिए ही सुरक्षित और अपराधमुक्त प्रदेश का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।