बहराइच की महसी तहसील में तैनात एसडीएम आलोक प्रसाद पर लगे गंभीर आरोपों को लेकर मामला चर्चा में रहा, लेकिन जांच के बाद इन आरोपों को निराधार बताया गया है। एसडीएम की सुरक्षा में तैनात तीन होमगार्ड जवानों ने उनके खिलाफ जातिसूचक शब्दों के प्रयोग, शारीरिक उत्पीड़न और जान से मारने की धमकी देने जैसे आरोप लगाते हुए उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में यह भी कहा गया था कि ड्यूटी के दौरान उनसे जबरन दौड़ लगवाई गई, उठक-बैठक कराई गई और फोटो भेजने के निर्देश दिए गए।
हालांकि, जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी के निर्देश पर कराई गई जांच में होमगार्ड जवान अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। जांच के दौरान संबंधित दिव्यांग व्यक्ति, तहसील के कर्मचारियों और शिकायतकर्ता होमगार्ड जवानों के बयान दर्ज किए गए। जांच रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी, जिसके बाद अधिकारियों ने इन्हें असत्य करार दिया।
लगाय ये आरोप
होमगार्ड विभाग की महसी कंपनी में तैनात आरक्षी राजाराम शुक्ला, रमाकांत मिश्र और राम कुमार तिवारी इन दिनों एसडीएम की सुरक्षा ड्यूटी में लगे हुए हैं। शिकायतकर्ताओं ने ड्यूटी व्यवस्था में अनियमितता और लंबे समय तक लगातार ड्यूटी कराने का भी आरोप लगाया था। वहीं, रमाकांत मिश्र ने मीडिया से बातचीत में कार्रवाई न होने पर आत्मघाती कदम उठाने जैसी बात भी कही थी।
एसडीएम ने कहा ये
दूसरी ओर, एसडीएम आलोक प्रसाद ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक दिव्यांग फरियादी जब उनके चैंबर में आया तो कुर्सी पर बैठते समय गिरते-गिरते बचा, जबकि तीनों होमगार्ड जवान वहां मौजूद रहते हुए भी मदद नहीं कर रहे थे। इसी बात पर उन्होंने केवल संवेदनहीनता को लेकर फटकार लगाई थी। एसडीएम का कहना है कि उनके द्वारा कोई अभद्र भाषा या अन्य आरोपित व्यवहार नही किया गया।