मेरठ में पुलिस ड्यूटी के दौरान कानून को खुली चुनौती देने का मामला सामने आया है। सड़क पर तैनात दारोगा को कुचलने की कोशिश के बाद मामला थाने तक पहुंचा, जहां आरोपियों ने पुलिस परिसर को ही अखाड़ा बना दिया। घटना के बाद पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए एक आरोपी को जेल भेज दिया, जबकि दूसरे को कोर्ट से राहत मिली।
ये है मामला
बताया गया है कि खरखौदा थाना क्षेत्र में बुधवार शाम यातायात व्यवस्था संभाल रहे दारोगा शिवम मिश्रा और सिपाही गौरव कुमार ने तेज रफ्तार से आ रही एक आई-20 कार को रोकने का प्रयास किया। कार चालक शिवांग त्यागी ने रुकने के बजाय स्पीड बढ़ा दी। हालात इतने बिगड़ गए कि दारोगा को कार के सामने खड़ा होना पड़ा, लेकिन चालक ने गाड़ी नहीं रोकी और दारोगा के पैर को चपेट में लेते हुए आगे निकल गया।
घटना के तुरंत बाद सिपाही ने सतर्कता दिखाते हुए इलाके में घेराबंदी कर वाहन को पकड़ लिया। कार चालक को थाने लाया गया, लेकिन मामला यहीं शांत नहीं हुआ। थोड़ी ही देर में आरोपी का भाई माधव त्यागी भी थाने पहुंच गया। आरोप है कि दोनों भाइयों ने पुलिसकर्मियों से बहस शुरू की, जो जल्द ही धक्का-मुक्की और हाथापाई में बदल गई।
थाने के अंदर हंगामे की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और स्थिति को काबू में लिया। दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर हवालात भेजा गया। इसके बाद दारोगा की शिकायत पर जानलेवा हमला, सरकारी काम में बाधा और अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया।
थाना प्रभारी ने कहा ये
थाना प्रभारी राजपाल सिंह के मुताबिक, घटना में इस्तेमाल की गई कार को सीज कर दिया गया है। आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से मुख्य आरोपी शिवांग को जेल भेज दिया गया, जबकि उसके भाई माधव को जमानत मिल गई।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ड्यूटी पर तैनात कर्मियों पर हमला कानून व्यवस्था पर सीधा हमला है और ऐसे मामलों में किसी भी स्तर पर नरमी नहीं बरती जाएगी।