मथुरा में साइबर ठगी के खिलाफ जो बड़ी कार्रवाई सामने आई, वह किसी एक दिन का फैसला नहीं थी। यह एसएसपी श्लोक कुमार की उस रणनीतिक सोच का नतीजा थी, जिसमें अपराध को सिर्फ दर्ज करना नहीं, बल्कि उसकी जड़ तक पहुंचकर नेटवर्क को तोड़ना लक्ष्य था। बीते कुछ महीनों से लगातार आ रही शिकायतें, संदिग्ध डिजिटल ट्रांजैक्शन और एक ही पैटर्न पर हो रही ठगी ने पुलिस को संकेत दे दिया था कि मामला बिखरा हुआ नहीं, बल्कि संगठित है।
शुरुआत से किया काम
एसएसपी श्लोक कुमार ने शुरुआती स्तर पर ही साफ कर दिया था कि अलग-अलग आरोपियों को पकड़ने से काम नहीं चलेगा। जरूरत पूरे सिस्टम को एक साथ झटका देने की थी। इसी सोच के तहत साइबर सेल, लोकल इंटेलिजेंस और तकनीकी यूनिट से मिले इनपुट को जोड़कर गोवर्धन क्षेत्र के चार गांवों को फोकस एरिया के तौर पर चिन्हित किया गया। इन गांवों से बार-बार ठगी के कॉल ट्रेस हो रहे थे, लेकिन आरोपी हर बार पहचान से पहले गायब हो जाते थे।
ऑपरेशन से पहले एसएसपी ने फील्ड अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि कार्रवाई दिखावटी नहीं, बल्कि निर्णायक होनी चाहिए। तय समय पर भारी पुलिस बल और पीएसी की मौजूदगी में चारों गांवों की घेराबंदी की गई। प्रवेश और निकास मार्ग बंद कर दिए गए ताकि कोई भी संदिग्ध भाग न सके। करीब दस घंटे तक चले सर्च ऑपरेशन में 37 लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि कुछ शातिर आरोपी मौके का फायदा उठाकर फरार हो गए।
पूछताछ और डिजिटल जांच में सामने आए तथ्य पुलिस के लिए भी हैरान करने वाले थे। एसएसपी श्लोक कुमार के अनुसार, आरोपी मोबाइल फोन और सिम कार्ड को महज कुछ दिनों तक इस्तेमाल करते थे। ठगी के बाद इन मोबाइलों को तोड़कर या खेतों में जमीन के अंदर दबा दिया जाता था, ताकि कोई तकनीकी सुराग न मिले। पैसों को सीधे बैंक खातों में डालने के बजाय डिजिटल गिफ्ट कार्ड के जरिए घुमाया जाता था, जिससे लेनदेन की कड़ी टूट जाए।
जांच आगे बढ़ने पर यह भी साफ हुआ कि इस नेटवर्क की जड़ें मथुरा तक सीमित नहीं थीं। सिम कार्ड दूसरे राज्यों से मंगवाए जाते थे और वेरिफिकेशन पूरा होने से पहले ही उनका इस्तेमाल कर लिया जाता था। गांवों में अचानक उभरी आलीशान कोठियां, महंगी गाड़ियां और शादियों में बेहिसाब खर्च लंबे समय से पुलिस के रडार पर था, जिसे अब ठगी की कमाई से जोड़ा जा रहा है।
एसएसपी ने कहा ये
एसएसपी श्लोक कुमार ने दो टूक कहा है कि यह कार्रवाई किसी एक दिन की सफलता मानकर खत्म नहीं की जाएगी। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क की परत-दर-परत जांच होगी। फरार आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है और दूसरे राज्यों से जुड़े लिंक भी खंगाले जा रहे हैं।
इस सख्त और योजनाबद्ध कार्रवाई के बाद मथुरा में साइबर अपराध से जुड़े गिरोहों में साफ संदेश चला गया है—अब पुलिस सिर्फ शिकायतों पर प्रतिक्रिया नहीं दे रही, बल्कि अपराध की पूरी चेन तोड़ने के लिए मैदान में उतर चुकी है।
जानें कप्तान के बारे में
इस पूरी कार्रवाई के केंद्र में रहे एसएसपी श्लोक कुमार मूल रूप से बिहार से ताल्लुक रखते हैं और 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद उन्होंने कॉरपोरेट सेक्टर में नौकरी भी की, लेकिन बाद में सिविल सेवा को अपना लक्ष्य बनाया।
यूपी कैडर में आने के बाद उन्होंने आगरा, रायबरेली, गाजियाबाद और हमीरपुर जैसे जिलों में अहम जिम्मेदारियां संभालीं। मथुरा में तैनाती के बाद उन्होंने साइबर अपराध, संगठित गिरोह और आर्थिक अपराधों पर विशेष फोकस किया। तकनीक और फील्ड इनपुट के संयोजन से काम करने की उनकी कार्यशैली ही इस बड़े साइबर नेटवर्क तक पहुंचने की वजह बनी।