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पुलिस सर्विस में जब पहली बार 'एनकाउंटर अजय' की आखें हुई नम

पुलिस सर्विस में जब पहली बार 'एनकाउंटर अजय' की आखें हुई नम

पुलिस स्मृति दिवस पर आज हर कोई यूपी पुलिस के शहीद सिपाही अंकित तोमर की शहदात को सलाम कर रहा है। इस निडर सिपाही ने ईनामी बदमाश के घर में घुस कर उसके छक्के छुड़ा दिए थे। लेकिन अफसोस की इस मुठभेड़ में ये जाबांज वर्दीवाला जिंदगी से हाथ धो बैठा था। उस वक्त इस निडर सिपाही ने तनिक भी नहीं सोचा था कि बदमाशों की गोली उसे सिर को छलनी कर देगी वो तो इस बात की फिक्र किए बिना जा भिड़ा था बदमाश की आंखों में आँखे डाल उसे सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए । वर्तमान में गौतमबुद्धनगर एसएसपी अजयपाल शर्मा उस वक्त शामली में एसएसपी थे उनके  नेतृत्व में ही ईनामी बदमाश साबिर की मुठभेड़ को अंजाम दिया गया था। देश के इस बेटे की असमय मौत से आहत एसएसपी अजयपाल शर्मा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डाल अंकित तोमर की शहादत को सैल्यूट भी किया था।  


एसएसपी ने बयां की थी उस रात की कहानी 


मैं उस दौरान शामली में एसपी था जब ईनामी बदमाश साबिर मुठभेड़ को अंजाम दिया गया था। जनवरी की उस शाम को मुझे एक संस्था के नववर्ष कार्यक्रम में शरीक होने के लिए बुलाया गया था कि तभी मेरे फोन की बेल बजी। फोन पर सूचना मिली की 1 लाख का ईनामी बदमाश साबिर अपने घर पर मौजूद हैं। साबिर एक दुर्दांत अपराधी था।उस पर अपने गैंग के साथ मिलकर 3 पुलिस कर्मियों की हत्या का आरोप था। इतना ही नहीं इस खूंखार अपराधी ने कुछ साल पहले एक व्यापारी से रंगदारी मांगी थी और रंगदारी ना मिलने पर इसने दो भाइयों की हत्या बीच बाजार कर दी थी और फरार हो गया था। यहां तक कि अपने खिलाफ मुखबिरी करने वालो को भी इस बदमाश ने मौत की नींद सुला दिया था।


बेहद ही खूंखार अपराधी था साबिर


साबिर पर 12 हत्या के मुकदमों सहित कुल 68 मामले दर्ज थे जिसमे तनिष्क में 10 करोड़ की डकैती भी शामिल थी। और वो सात महीने पहले जनपद बाराबंकी में पुलिस कस्टडी से फरार हो गया था। ऐसे में जब फोन पर मुझे इस खूंखार बदमाश की घर में होने की सूचना मिली तो मैने फौरन पार्टी छोड़ दी और कैराना समेत कई थानों की पुलिस बुलाकर तीन टीमें बनाई। सभी को टारगेट बताकर घेराबंदी की और साबिर को पकड़ने की रणनीति भी समझा दी । पुलिस टीम ने जब साबिर के घर की घेराबंदी की तो किसी ने सोचा भी नहीं था कि वे आज अपना एक साथी खो देंगे। जब भी कोई पुलिसकर्मी दबिश देना जाता है उस वक्त उसके अंदर सिर्फ एक ही सोच होती है कि वो अपराधी जो समाज के लिए खतरा बना हुआ है उसको हर हाल में गिरफ्तार करना है। उस समय उसके लिए उसके परिवार से ज्यादा समाज है।अगर वो ऐसा न सोचें तो शायद वो कभी ऐसे अपराधी को न पकड़ पाए।


“ये बेटे को कंधा देने जैसा दर्द था”


जनवरी की सर्द रात थी और पुलिस टीम रात के 10 बजे मौके पर पहुंच गई । अंधेरे में ही सभी वर्दीवालों ने पोजिशन ले ली । एक टीम जिस में जांबाज़ सिपाही अंकित था वो उस कमरे को कवर करने पहुंची जहां ईनामी बदमाश साबिर छिपा हुआ था और फिर दोनों तरफ से गोलियां चली। इस फायरिंग में अंकित के सिर में एक गोली जा लगी । अंकित ज़मीन पर गिर गया । इस एक पल में अंकित ने अपने परिवार के हर उस शख्स मां-बाप भाई-बहन पत्नी, 4 साल की मासूम बच्ची और 4 महीने के बेटे को जरूर याद किया होगा ।  क्योंकि इस आखिरी पल के बाद उसके दिमाग में खून की सप्लाई बंद हो चुकी थी । उधर बदमाश भी मारा जा चुका था । बहरहाल अंकित को गंभीर हालत में हमारी पुलिस टीम ने अस्पताल में भर्ती कराया । अंकित ने 24 घंटे जिंदगी और मौत की कशमकश में गुजारे और फिर देश का ये लाल कभी ना उठने वाली नींद सो गया। मेरी टीम के इस जाबांज पुलिसकर्मी ने फर्ज की राह पर चलते हुए सबसे बड़ा बलिदान दिया था। अपनी टीम के अंकित तोमर जैसे जांबांज सदस्य को खोना बहुत बड़ा नुकसान है। ‘एक कप्तान के लिए अपने साथी के शव को कंधा देना वैसा ही है जैसे एक बाप का अपने बेटे को कंधा देना।‘ अंकित को खोने का दुख महसूस करना बहुत भारी था जैसे सब लड़ाईयां जीत कर हम एक जंग हार गए । दसियों महीने बीत जाने के बाद भी अब भी तुम बहुत याद आते हो अंकित

“भगवान उसकी आत्मा को शांति दे”

मुख्य संवाददाता

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