Smart Policing

आज भी यूपी पुलिस 'कोतवाल' शहीद धन सिंह को करता है याद.... मेरठ के सदर थाने लगी है प्रतिमा

आज भी यूपी पुलिस 'कोतवाल' शहीद धन सिंह को करता है याद.... मेरठ के सदर थाने लगी है प्रतिमा

देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। अंग्रेजो हुकूमत  की गुलामी से आजादी दिलाने वाले क्रांतिकारियों में मेरठ जिले के कई सुरमाओं ने अपनी जान न्योछावर कर देश और उसकी आवाम को आजाद कराने में अहम भूमिका निभाई थी... क्या आपको पता है कि अंग्रेजो के खिलाफ क्रांति की जो आग लोगों के दिल में धधकी थी वह उत्तर प्रदेश का मेरठ जिला ही था... और मेरठ जिले के ही सबसे ज्यादा क्रांतिकारियों ने अपनी कुर्बानी देकर आजादी की मशाल को प्रज्वलित किया था। जिले के क्रांतिकारियों में एक नाम शहीद धन सिंह कोतवाल गुर्जर का भी नाम आज भी बेहद की सम्मान के साथ लिया जाता है। जिन्होंने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत में सदर थाना के कोतवाल पर पर तैनात रहते हुए देश की आजादी की पटकथा को लिखा था। इतना ही नहीं कोतवाल धन सिंह गुजर ही थे जिन्होंने जिले के युवाओं में आजादी के प्रति जोश भरने के साथ-साथ देश को अंग्रेजी हुकूमत के चंगुल से आजाद कराने के लिए जगाया था। 

क्रांतिकारियों को छुड़ाने के लिए लगाई जान की बाजी

इतिहासकार डॉ. नवीन गुप्ता द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक जिस समय देश में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआती हुई थी तब आजदी दिलाने के लिए 1857 के  आंदोलन ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जमकर विद्रोह कर दिया था। सभी को अंग्रेजो ने विक्टोरिया पार्क की जेल में बंद कर दिया गया था। ऐसे में जेल में पहले से ही 839 क्रांतिकारी बदं थे। लेकिन शहीद धन सिंह कोतवाल गुर्जर के दिल और दिमांग में रोष पैदा हो गया, जिसके बाद उन्होंने 1 रणनीति बनाकर सभी को जेल से छुड़वा लिया था। तब वह चिंगारी इतनी फैली कि अंग्रेजी अफसरों को भी क्रांतिकारियों ने मार गिराया था।

सदर थाने में आज भी लगी है धन सिंह कोतवाल की प्रतिमा

कोतवाल शहीद धन सिंह के सम्मान में आज भी मेरठ जिले के सदर थाने में उनकी प्रतिमा लगी हुई है। आपको बता दें कि साल 2018 में उत्तर प्रदेश पुलिस के तत्कालीन डीजीपी ओपी सिंह ने इस प्रतिमा का अनावरण किया था। मूल रूप से पूर्व डीजीपी का इस प्रतिमा को लगाने के पीछे का जो उद्देश्य था वह यह कि जो कोई भी थाने आए वह आजादी की लड़ाई में शहीद हुए इस वीर को जरूर नमन करे। जिनके आव्हाव से देश को आजाद कराने में अहम योगदान मिला है।

एक आवाज पर एकत्रित हो गए थे ग्रामीण

इतिहासकारों की माने तो जिस समय अंग्रेजी हुकूमत को खुद को आजाद कराने के लिए क्रांति की शुरूआत की गई थी। उस समय शहीद धन सिंह कोतवाल गुर्जर की महज एक आवाज पर ही पांचली, लिसाड़ी, गगोल सहित अन्य गांव के सभी ग्रामीण विक्टोरिया पार्क जेल की तरफ रवाना हो गए थे। ग्रामीणों का जोश अपने अन्य साथियों को छुड़ाकर दिल्ली की तरफ आगे बड़ता जा रहा था।

लेखक

Madhvi Tanwar

Police Media News

Leave a comment