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सालों पहले मरे लोगोें को जिंदा बता रही है यूपी की हाईटेक पुलिस

सालों पहले मरे लोगोें को जिंदा बता रही है यूपी की हाईटेक पुलिस

उत्तर प्रदेश पुलिस लगातार अपनी लापरवाह कार्यशैली की वजह से सवालों के घेरे में है और अब तो अति ही हो गई है। मामला बदायूं का है। बताया जा रहा है कि यहां जब एसएसपी ने रियलिटी चेक कराई तो पुलिस रिकार्ड में ऐसे 109 हिस्ट्रीशीटरों के नाम भी निकले जो सालों पहले दुनिया को अलविदा कह चुके थे

जानिए पूरा मामला

बदायूं जिले की पुलिस के लिए मुर्दे हिस्ट्रीशीटर भी वारदात को अंजाम देती हैं। जी हां ये हम नहीं कह रहे हैं दरअसल ये हैरान कर देने वाली हकीकत सामने आई है एसएसपी के रियलटी चेक में। आमजन के साथ वारदात होने पर हमेशा मौके पर देर से पहुंचने वाली पुलिस मुर्दों की निगरानी बड़ी मुस्तैदी से करती है। गौर करने वाली बात है कि सालों से कागजों पर ये खेल खेला जा रहा है लेकिन  पुलिस का ये कारनामा उस वक्त उजागर हो गया जब एसएसपी ने रियलिटी चेक किया।एसएसपी ने जिले भर में हिस्ट्रीशीटरों का सत्यापन कराया तो 109 ऐसे नाम निकले जो दिन, हफ्ते, महीने नहीं सालों पहले दुनिया छोड़ चुके थे।

ऐसे आई सामने हकीकत

आपको बता दें कि पिछले दिनों एसएसपी ने जिले भर में घोषित हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी करने के निर्देश दिए थे। हर थाने से उनके हिस्ट्रीशीटर, उनकी वर्तमान स्थिति, आय का जरिया आदि का सत्यापन कराया। ऐसे में जिले में कुल 2230 हिस्ट्रीशीटर निकले। और इस सत्यापन मे पुलिस की कारगुजारी की पोल खुल गई।  सत्यापन में सामने आया कि 109 हिस्ट्रीशीटर की सालों पहले मौत हो चुकी थी।

सबसे ज्यादा ढीली अलापुर पुलिस

रियलिटी चेक में सबसे ज्यादा लापरवाही अलापुर थाने की सामने आई। गौर करने वाली बात है कि हिस्ट्रीशीटर मरते चले गए, थाना प्रभारी को खबर ही नहीं थी। 18 हिस्ट्रीशीटर दिवंगत निकले। बिल्सी और दातागंज में 13-13 तो बिसौली में 12 हिस्ट्रीशीटर पुलिस के रिकॉर्ड में जिंदा थे।

थाने वार ब्यौरा

मूसाझाग : 9
सिविल लाइंस : 6
वजीरगंज : 6
उघैती : 6
इस्लामनगर : 6
फैजगंज बेहटा : 5
उझानी : 4
बिनावर : 3
उसावां, मुजरिया, जरीफनगर : 2-2
कुंवरगांव, कादरचौक : 1-1 10 साल पहले मर चुके थे चार हिस्ट्रीशीटर

सामने आई चौंकाने वाली हकीकत

अभियान ने चौंकाने वाली हकीकत उजागर की। चार हिस्ट्रीशीटरों के घर पर जब पुलिस पहुंची तो पता चला कि उनकी मौत को 10 साल से ज्यादा का समय हो गया था। वहीं 28 की मौत पांच साल पहले हो चुकी और 77 ऐसे थे जो पिछले 5 सालों के दरम्यान दुनिया को अलविदा कह चुके थे। बड़ी वारदात तो छोड़िए चुनाव, साम्प्रदायिक तनाव, बड़े त्योहारों तक में कागजों पर ही हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी करती रही। कई अधिकारी आए और चले गए। किसी ने थानों की यह कारस्तानी नहीं पकड़ी। 

लापरवाही करने वालों के खिलाफ विभागीय जांच

वहीं एसएसपी अशोक कुमार के मुताबिक हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी में भारी लापरवाही हो रही थी। जिन थाना प्रभारियों के यहां खानापूर्ति कर मृत लोगों की निगरानी का मामला उजागर हुआ उनके खिलाफ विभागीय जांच की जाएगी। मूल जिम्मेदारी बीट के सिपाही की है, जो फील्ड में जाने के बजाय थाने में बैठकर ही रिपोर्ट देते रहे थे।

 

लेखक

Nisha Sharma

Police Media News

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