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प्रदेश में क्यों दरकिनार किए जा रहे हैं एनकाउंटर करने वाले पुलिसकर्मी

प्रदेश में क्यों दरकिनार किए जा रहे हैं एनकाउंटर करने वाले पुलिसकर्मी

उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने के बाद योगी सरकार के नेतृत्व में खाकी ने जो राह अख्तियार की थी अब वहीं खाकी उस राह से तौबा करती नजर आ रही है। दरअसल ये हम नहीं हर रहे हैं बल्कि ये तो पिछले दिनों हुए तबादले और दरकिनार किए गए अधिकारियों से लेकर पुलिस कर्मचारियों के हाल-ए-बयां देखकर साफ-साफ नजर आ रहा है। प्रदेश में हुए ताबड़तोड़ एनकाउंटरों को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज क्या कर दिया गया कि प्रदेश की पुलिस ने तो एनकाउंटर के नाम पर तमगे हासिल करने वाले अधिकारियों को ही दरकिनार कर दिया।  जी हां उत्तर प्रदेश में पिछले 2 माह से अधिकारियों और कर्मचारियों को दरकिनार करने का सिलसिला जारी है। ये वे अधिकारी है जिनकी पहचान प्रदेश में एनकाउंटर मैन के तौर पर थी और इन्होने ही कुख्यात और दुर्दांत बदमाशों की सांसे हलक में अटका रखी थी। लेकिन आज यही एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के नाम से मशहूर अधिकारी अपने ही विभाग की बेरूखी का शिकार हो रहे हैं। अब सवाल ये उठता है कि आखिर इस बेरूखी की वजह क्या है। कहीं ये सुप्रीम कोर्ट में एनकाउंटर के खिलाफ दायर की गई याचिका की वजह से तो नहीं किया जा रहा या फिर आगामी लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनजर एक रणनीति के तहत किया जा रहा है। गौरतलब है कि प्रदेश में मार्च 2017 में सत्ता हासिल करते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ ने सूबे की पुलिस को एनकाउंटर नाम का हथियार थमाया था साथ ही दो टूक कह दिया था कि बदमाश या तो जेल जाएंगें नहीं तो सीधा यमलोक जाएंगे। सीएम से हरी झंड़ी मिलते ही प्रदेश में एनकाउंटर नाम के हथियार से कई जाबांज और दिलेर अधिकारियों ने सूबे से अपराध और अपराधियो के सफाया मिशन को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया । इसी दौरान कई अधिकारियों की अपराधियो के खिलाफ की गई ताबड़तोड़ कार्रवाइयों की वजह से एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के तौर पर पहचान भी बनी। आलम ये था कि बदमाशो की गोली का जवाब पुलिस ने भी गोली से दिया और नतीजा सबके सामने था। जहां कितने ही शातिर और दुर्दांत सलाखों के पीछे चक्की पीसते नजर आए तो कितनो का टिकट सीधा यमलोक कट गया। लेकिन बावजूद इसके प्रदेश को अपराध और अपराधी मुक्त बनाने वाले अधिकारो को दरकिनार किया गया चलिए जानते हैं कौन किया गया कब दरकिनार

1.अजय साहनी एनकाउंटर मैन 

2009 बैच के तेजतर्रार आईपीएस ऑफिसर और प्रदेश के कई विभिन्न जिलों में तैनात रहे अजय साहनी को भी कुछ दिनों पहले दरकिनार कर दिया गया। आपको बता दें कि ये वही अजय साहनी है जिन्होने अपराधियो का गढ़ माने जाने वाले आजमगढ़ में कुख्यातों और दुर्दांत अपराधियों के घरों में सेंध लगाकर उनकी रातों की नींद उड़ा दी थी। पूर्वांचल के सबसे बड़े अपराधियों के शहर आजमगढ़ में चार्ज संभालते ही अजय साहनी की ताबड़तोड़ कार्रवाईयो से अपराधी थर्रा उठे थे । अब आलम ये था कि अजय साहनी के खौफ ने आजमगढ़ ही नहीं बल्कि आस-पास के जनपदों के बदमाशों की हालत भी पतली कर छोड़ी थी। अजय साहनी की उपलब्धियो को देखते हुए ही प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हे जनपद अलीगढ़ का चार्ज सौंपा था। आपको बता दें कि अलीगढ़ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े जिलों में गिना जाता है और यही वजह है कि यहां के अपराधी भी बड़े नामों से जाने जाते हैं। बहरहाल एनकाउंटर के नाम से पहचान रखने वाले अजय साहनी ने भले ही 400 किलोमीटर दूर का जिला पाया लेकिन उनके काम का तरीका चिरपरिचित ही रहा। अब अलीगढ़ में अजय साहनी की गोलियां की तड़तड़ाहट ने बदमाशों के हौसले पस्त कर छोड़े। इस एनकाउंटर मैन की गोलियों से कितने ही अपराधी ढेर भी हुए। हालांकि कई बार अजय साहनी के एनकाउंटरों को लेकर विपक्ष ने सवालिया निशान भी लगाए लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री सदैव अजय साहनी के एनकाउंटर के पक्ष में खड़े नजर आए और उन्होने विपक्षियों के सवालों का मुंहतोड़ जवाब देते हुए कहा भी कि हमारी पुलिस बदमाशों को उनकी सही जगह भेज रही है। बहरहाल अब सवाल ये उठता है कि अजय साहनी को दरकिनार क्यों किया गया है । क्या अब उनकी जरूरत क्षेत्र में नहीं है और ना ही जनता की सेवा के लिए। फिलहाल अजय साहनी एपीएसई में अपने जवानों का मन बहला रहे हैं

2.एनकाउंटर अजय पाल शर्मा

प्रदेश पुलिस में तैनात 2010 बैच के खूंखार, दबंग, दिलेर आईपीएस ऑफिसर अजय पाल शर्मा भी मुख्यमंत्री के चहेते अधिकारियों की लिस्ट में जगह रखते हैं। आपको बता दें कि  ये वही अजय पाल शर्मा है जिन्होंने 2017 में योगी सरकार बनने के बाद शामली जिले में डबल एनकाउंटर को अंजाम देकर प्रदेश में एनकाउंटर की शुरुआत की थी। उसके बाद तो प्रदेश में ताबड़तोड़ एनकाउंटरों की बाढ़ सी आ गई। ऐसा कोई दिन नहीं गया जब पुलिस की गोलियां लहू लेकर न सोई हों या यूं कहें उत्तर प्रदेश पुलिस की बंदूकों के मुंह खून लग गया था।  एनकाउंटर के नाम से पहचान बनाने वाले अजय पाल शर्मा का नाम मुख्यमंत्री की गुड बुक के साथ -साथ जुबान पर भी हर पल रहता था।  प्रदेश के मुख्यमंत्री चाहे भाषण हो या फिर इंटरव्यू हर जगह आईपीएस ऑफिसर अजय पाल शर्मा का गुणगान करते नहीं थकते थे। वे आईपीएस अजय पाल शर्मा का उदाहरण देते हुए देखे जाते थे कि देखिए किस तरीके से अजय पाल ने बदमाशों का सफाया किया.... इतना ही नहीं जब एनकाउंटर अजय से खौफजदा होकर बदमाश तख्ती लेकर सड़कों पर घूमे तो उस सूरत-ए हाल को भी प्रदेश के मुख्यमंत्री ने खुले मंच पर बड़े जोश के साथ बयां करते हुए कहा कि ये योगी सरकार है जिसमें अपराधी तख्ती लेकर घूम रहा है।  मुख्यमंत्री की खुशी और शाबाशी के नतीजे स्वरूप कुछ दिनों पहले मार्च 2018 में डॉ अजय पाल शर्मा को एनसीआर के महत्वपूर्ण  गौतमबुद्ध नगर का जिम्मा सौंप दिया गया । ये वो दौर था जब गौतम बुद्धनगर अपराध और अपराधियों से दहशतज़दा था। वहीं जनपद में हुए 3 एनकाउंटरों पर सवालिया निशान लगे हुए थे । अराजकता के इस माहौल में गौतम बुद्धनगर को जरूरत थी अपराधियों की ईंट से ईंट बजा देन वाले और बदमाशों की गोलियों का जवाब सीधे गोलियों से देने वाले एक अदद सख्त अधिकारी की।और फिर गौतमबुद्धनगर की एसएसपी की कुर्सी सुपरकॉप आईपीएस अजय पाल शर्मा ने संभाली। शामली जैसे देहात से दिल्ली एनसीआर की चकाचौंध में आए आईपीएस अजय पाल शर्मा ने जनपद का चार्ज संभालने के साथ ही एनकाउंटर कर 50000 के इनामी को ढेर कर डाला। इस एनकाउंटर में मेरठ जोन के तेजतर्रार एडीजी प्रशांत कुमार भी शामिल रहे। वहीं अब जनपद की पुलिस अपने कप्तान के मूड को भली-भांति समझ गई थी और फिर उसके बाद तो जनपद में हर दिन अपराधियों के खात्मे के नाम रहा नतीजतन जनपद की कोई सड़क ऐसी नहीं बची जहां पर बदमाशों ने पुलिस को चुनौती न दी हो और  पुलिस की गोली ने उसे अपना निवाला न बनाया हो। लेकिन कुछ दिनों पूर्व हुई तबादला लिस्ट में इस दबंग आईपीएस ऑफिसर को भी दरकिनार कर दिया गया है । बहरहाल अब इसे क्या कहा जाए सुप्रीम कोर्ट में चल रही याचिका का डर या फिर लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर कोई रणनीति

3- भगवत सिंह गुर्जर

आपको बता दें कि प्रदेश पुलिस में तैनात 2001 बैच के निरीक्षक भगवत सिंह गुर्जर भी प्रदेश के तेजतर्रार इंस्पेक्टर में शुमार हैं। भगवत सिंह गुर्जर योगी सरकार में एनकाउंटर में शहीद हुए अंकित तोमर के साथ घायल हुए थे। बदमाश को मौत की नींद सुलाने वाले भगवत सिंह गुर्जर ने जिंदगी और मौत की जंग 15 दिनों तक अस्पताल में लड़ी और उसके बाद यमराज को मात देकर वे एक बार फिर बदमाशो के छक्के छुड़ाने के लिए काम पर लौट आए थे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भगवत सिंह गुर्जर जनवरी 2018 में हुए 50000 के इनामी साबिर जंधेड़ी के एनकाउंटर में शामिल थे। गौरतलब है कि साबिर चंदेरी पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कुख्यात बदमाश था उस पर 4 दर्जन से ज्यादा मुकदमे शामिल थे ।वहीं उस पर प्रदेश पुलिस के 4 जवानों की हत्या का भी आरोप था ।बताया जाता है कि पुलिस को देखते ही गोली चला देने वाले साबिर चंदेरी ने जैसे ही शामली पुलिस की टीम को सामने देखा तो उसने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी थी। बदमाशों द्वारा फायरिंग में प्रदेश पुलिस ने अपने जांबाज सिपाही अंकित तोमर को खो दिया था तो वहीं इस्पेक्टर भगवत सिंह गुर्जर को भी तीन गोली लगी थी।मेरठ के निजी अस्पताल में 1 महीने से ज्यादा समय तक उनका इलाज चला था। इस एनकाउंटर में भगवत सिंह गुर्जर अपने दोनों हाथों के अंगूठे खो चुके हैं लेकिन उनके जज्बे में कहीं कोई कमी नहीं आई बल्कि मौत को मात देकर काम पर वापस लौटने के बाद तो उन्होने बदमाशों को सिर्फ गोली से ही जवाब दिया । लेकिन शायद अब इस एनकाउंटर मैन की जरूरत जनता की सुरक्षा और बदमाशों को उखाड़ फेंकने के लिए नहीं है बल्कि कप्तान साहब के फोन उठाने के लिए है । जी हां बात गले से भले ही नीचे न उतर रही हो लेकिन सच यही है कि अब गोली चलाने वाले भगवत सिंह गुर्जर कप्तान का फोन उठाया करेंगे

4-गोली से भी तेज चलने वाले इंस्पेक्टर सचिन मलिक

प्रदेश पुलिस में तैनात 2001 बैच के इंस्पेक्टर सचिन मलिक के काम की सराहना भी प्रदेश के पुलिस मुखिया कई बार कर चुके हैं। आपको बता दें कि ये वही सचिन मलिक हैं जिन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश से बदमाशों को उखाड़ फेंकने की शुरुआत की थी। सचिन मलिक की गिनती प्रदेश के 29 उन इंस्पेक्टरों में की जाती है जिन्हे बड़े से बड़े बवालों को शांत करने में महारत हासिल है और जो अपराधियों के बारे में सबसे ज्यादा जानकारी रखते हैं। ये वही सचिन मलिक हैं जिन्हे आसपास के जनपदों में हुए बड़े बवालो के दौरान बुलाया गया ।सचिन मलिक के काम की जनता भी खूब सराहना करती है। लेकिन वर्तमान में गाजियाबाद में तैनात सचिन को दरकिनार कर दिया गया। लेकिन कहते हैं ना काम करने वाले को कुर्सी की जरूरत नहीं होती । दरकिनार के समय पर भी सचिन मलिक ने करोड़ों की डकैती का खुलासा करने में प्रमुख भूमिका निभाई थी।ऐसे में तत्कालीन कप्तान और तत्कालीन थानाध्यक्ष साहिबाबाद दिनेश यादव को हटा दिया गया था। लेकिन बावजूद इसके अपने काम के बूते पहचान बनाने वाले सचिन मल्लिक दरकिनार कर दिए गए हैं। सूत्रों की माने तो सचिन को बीजेपी विधायक से पंगा लेना भारी पड़ गया । ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि बदमाशों पर बरसने वाले सचिन मल्लिक को क्यों दरकिनार कर दिया गया है 

5-धर्मेंद्र पवार का नाम काफी है

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई जिलों में तैनात रहे धर्मेंद्र पवार के काम करने के तरीके को भी दरकिनार नहीं किया जा सकता।  तेज तर्रार और पैनी निगाह रखने वाले धर्मेंद्र पवार 2001 बैच के इंस्पेक्टर है। आपको बता दें कि ये वही धर्मेंद्र पवार है जो प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद सबसे पहले एनकाउंटर में शामिल रहे थे। धर्मेंद्र उस समय के तत्कालीन कैराना के थाना प्रभारी थे । उन्हे मुखबिर से सूचना मिली थी दो बड़े अपराधी किसी बड़ी  घटना को अंजाम देने के लिए उनके क्षेत्र में आए हैं । बस सूचना मिलते ही धर्मेंद्र पवार ने मात्र 15 मिनट में अपनी टीम को तैयार किया और बदमाशों की घेराबंदी कर ली। और फिर बदमाशों ने पुलिस को देखते ही फायरिंग शुरू कर दी। और जैसा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री ने हिदायत दे रखी थी कि अपराधियों की जगह सिर्फ यमराज के पास है उसी के मुताबिक धर्मेंद्र ने भी बदमाशों की गोलियों का जवाब गोली से दिया और एनकाउंटर में बदमाश मारे गए ।इस डबल एनकाउंटर में धर्मेंद्र पवार भी घायल हुए थे।लेकिन धर्मेंद्र ने अपने काम करने का तरीका नहीं बदला और उन्होने प्रदेश की योगी सरकार के एकमात्र लक्ष्य,बदमाशों की जगह या तो जेल में या फिर यमराज के पास में अहम भूमिका निभाई ।लेकिन सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर होने के बाद एनकाउंटर को लेकर प्रदेश पुलिस और प्रदेश सरकार अब तौबा करती नजर आ रही है और यही वजह हो सकती है इस ऑफिसर को भी दरकिनार कर दिया गया है और अब ये फाइल बाबू का काम करेंगे

एनकाउंटरों को लेकर बैकफुट पर आई सरकार

बहरहाल  प्रदेश में इन पुलिस कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों को दरकिनार किए जाने के चर्चे दबी जुबान में खूब हो रहे हैं। कहा जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट में प्रदेश के एनकाउंटरों को लेकर दायर याचिका के बाद सरकार बैकफुट पर आ गई है । वहीं कहा ये भी जा रहा है कि विपक्ष लगातार मौजूदा सरकार पर फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगाकर निशाना साध रही है । इसलिए सरकार अब एनकाउंटरों से तौबा कर रही है। बहरहाल ऐसे में सवाल उठता है कि अगर प्रदेश में हुए एनकाउंटरों में शामिल पुलिस कर्मचारियों पर कोई बात आती है तो क्या सरकार इन कर्मचारियों और अधिकारियों से किनारा कर लेगी या फिर उनके साथ खड़ी होगी । बहरहाल जो भी हो लेकिन मौजूदा हालात में तो प्रदेश में पुलिस कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों तक को दरकिनार किया गया है उससे ये साफ जाहिर हो रहा है है कि अब प्रदेश को एनकाउंटर करने वाले अधिकारियों की जरूरत नहीं रही है या यू कहिए कि प्रदेश के महाराज को अब बदमाशों को यमराज के पास भेजने में नहीं बल्कि सलाखों के पीछे देखने में ज्यादा मजा आ रहा है।

लेखक

Nisha Sharma

Police Media News

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