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जब मां-बाप ने ठुकराया तब इंस्पेक्टर ने गले लगाया

जब मां-बाप ने ठुकराया तब इंस्पेक्टर ने गले लगाया


अक्सर देखा गया है कि पति-पत्नी के घरेलू विवाद में बेचारे मासूम बच्चे पिस जाते हैं..मां-बाप दोनों का साया हमेशा सिर पर चाहने वाले मासूमों को बेवजह सजा मिलती है। डरे-सहमे इन बच्चों की ख्वाहिश तो यही होती है मम्मी-पापा हमेशा खुश रहे कभी ना झगड़े लेकिन ऐसा मुमकिन नहीं होता और कई बार पति-पत्नी का विवाद इतना बढ़ जाता है कि वो अपने कलेजे के टुकड़ों से ही मुंह मोड़ लेते हैं और उन्हे छोड़ने पर अमादा हो जाते हैं... ऐसे ही एक मामले में एक बाप ने अपने पिता होने के फर्ज से मुंह मोड़ते हुए अपने दोनो बेटों को ससुराल के गेट पर छोड़ दिया और चला आया। बच्चे रोते रहे बिलखते रहे लेकिन ना निर्दयी बाप वापस आया और ना ही कठोर मां ने इन्हे अपनाया।  लेकिन इन बच्चों के आंसू देखकर एक इंस्पेक्टर का दिल भर आया और उन्होने पिता की तरह मासूमों को गले से लगा लिया ।


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पति-पत्नी के विवाद  मासूमों को मिली सजा 

कासगंज जिले के कस्बा सोरो में रहने वाले एक युवक ने 12 साल पहले प्रेम विवाह किया था। कुछ वक्त तक तो गृहस्थी का पहिया दुरूस्त चल रहा था। दो बेटों के होने से जैसे परिवार पूरा हो गया था। इनका एक आठ साल का बेटा है और एक 6 साल का। लेकिन ना जाने कैसे इस हंसते खेलते परिवार को किसी की नजर लग गई और पिछले 1 साल से पति-पत्नी में किसी बात को लेकर तनातनी कायम है। विवाद इतना बढ़ गया है कि पत्नी अपने मायके जाकर रह रही है। तब से दोनों बेटे अपने पिता के साथ रह रहे थे । लेकिन मंगलवार को ये पिता भी बेरहम हो गया। गुस्से मे वो दोनो बेटों को अपनी ससुराल के गेट पर छोड़कर भाग गया। बच्चे मम्मी-पापा पुकारते रहे। रोते रहे लेकिन बेरहम बाप ने मुड़कर नहीं देखा और ना ही मां का दिल पसीजा। रोते-बिलखते बच्चों को देखकर पूरा मुहल्ला इकट्ठा हो गया लेकिन इनकी मां ने तो मासूमों को अपने पास रखने से ही मना कर दिया

मासूमों को इंस्पेक्टर ने गले लगाया


लेकिन वो कहते हैं ना आज भी दुनिया में भले इंसानों की कमी नही है। जी हां मां-बाप के बच्चों के प्रति इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये की खबर जब इंस्पेक्ट योगेश सिरोही को मिली तो वे फौरन वहां पहुंच गए और  बच्चों को थाने ले आये। मासूमों की रोती आंखे देकर जैसे उनका दिल भी दर्द से भर उठा था। पहले तो इस भले इंस्पेक्टर ने बच्चों को चुप कराया फिर उसके बाद वे उन्हे एक रेस्टोरेंट में भी ले गए और दोनो को चॉक्लेट दी और खाना खिलाया। लेकिन बच्चों के लिए मां-बाप से बढ़कर कोई नहीं हो सकता इसलिए ये मासूम बार-बार रोते रहे। इंस्पेक्टर साहब से जैसे बच्चों का रोना बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होने आगे बढ़कर एक पिता की तरह दोनो मासूमों को सीने से लगा लिया । बाद में बाल कल्याण समिति की टीम भी वहां आ गयी। मग़र इंस्पेक्टर ने कहा कि वे किसी गैर को इन मासूमों को नहीं सौंपंगे । भले ही पूरी रात क्यो न इनके साथ जगना पड़े।

मासूम क्यों भुगते सजा

खैर इंस्पेक्टर साहब तो भले इंसान थे जिन्होने इन मासूमों के दर्द को समझा लेकिन सवाल ये उठता है कि उन मां-बाप ने इन्हे पैदा ही क्यों किया जब उनहोने इन मासूमों को रास्ते पर छोड़ दिया। झगड़ा इनके मां-बाप करें और सजा ये मासूम क्यों भुगते। ये निर्दयी मा-बाप उन माता-पिता से पूछे जो औलाद के लिए तरसते रहते हैं। इन्हे तो कुदरत ने फूल से मासूमो से नवाजा था फिर इन्होने उन मासूमों को दुनिया की ठोकर खाने के लिए रास्ते पर छोड़ दिया। जी हां ऐसे ना जाने कितने मासूमों को मां-बाप के झगड़े  के चलते दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर होना पड़ता है।

 

लेखक

Mahima shukla

Police Media News

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