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जब दरोगा की मदद से सिसक रहे मासूमों की मां को नसीब हो पाया अंतिमसंस्कार

जब दरोगा की मदद से सिसक रहे मासूमों की मां को नसीब हो पाया अंतिमसंस्कार

लखनऊ के तेलीबाग के शमशान घाट पर मंगलवार सुबह मां के शव के पास बैठकर सिसक रहे तीन मासूमों को देखकर हर किसी का कलेजा मुंह को आ गया। मां की अस्पताल में बीमारी से मौत के बाद नाना की मदद से बच्चे मां का शव लेकर घर पहुंचे तो मकान मालिक ने भगा दिया। किसी तरह बच्चे शव लेकर शमशान पहुंचे लेकिन मां की चिता को आग देने के लिए इन नन्ही सी जानों के पास फूटी कौड़ी भी नहीं थी। किस्मत के मारे ये मासूम और बुजुर्ग नाना शव को किनारे रखकर आंसू बहाने को मजबूर थे। लेकिन पीजीआई दरोगा तक जब इनकी दर्दभरी कहानी पहुंची तो वे खुद को रोक ना सके और शमशान घाट आ गए। और फिर इस दरोगा की मदद से इन मासूमों की मां को अंतिमसंस्कार नसीब हो पाया

जानिए पूरा मामला

मामला रायबरेली रोड पर पीजीआई थाना क्षेत्र की सीमा पर स्थित पिपरौली गांव का है। यहां किराए के मकान में रहने वाले रेलवे से रिटायर्ड चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शिव प्रकाश की 35 वर्षीय बेटी नीलम अपने तीन मासूम बच्चों के साथ रहती थी। नीलम ने बहराइच के हाफिज से प्रेम विवाह किया था लेकिन पिछले साल हाफिज उसे छोड़कर भाग गया। नीलम काफी समय से बीमार चल रही थी। पिता की सारी पेंशन और बचत की रकम उसके इलाज में खर्च हो गई। आर्थिक हालत खस्ता होने की वजह से पिता अपनी बीमार बेटी का घर पर ही इलाज कराने को मजबूर थे । रविवार को नीलम की हालत काफी बिगड़ गई तो शिव प्रकाश उसे लोकबंधु अस्पताल ले गए वहां से डॉक्टरों ने उसे बलरामपुर अस्पताल भेज दिया। और मंगलवार सुबह नीलम ने आखिरी सांस ली। 

मकानमालिक ने शव देखा तो भगा दिया

पिता शिवप्रकाश अपने तीन मासूम नातिनों के साथ नीलम का शव लेकर रोते-बिलखते घर पहुंचे तो मकान मालिक ने घर में घुसने नहीं दिया । उसने फटकारते हुए उन्हे वहां से भगा दिया। इसके बाद बेबसी के मारे ये नीलम का शव लेकर तेलीबाग के शमशान घाट आ गए । लेकिन जेब खाली थी तो शव का अंतिम संस्कार भी ना हो सका। और हारकर गमज़दा तीन मासूम और बुजुर्ग नाना शव को एक किनारे रखकर आंसू बहाते रहे। 

 पिता पहले ही छोड़कर भाग गया था

मासूमों की बदकिस्मती तो देखिए कि पिता तो पहले ही छोड़कर भाग गया था और अब बीमार मां भी भरी दुनिया में अकेला छोड़कर चली गई थी। मां के जाने के दुख से बेहाल गरीब नन्हे मासूमों के पास मां का शव एक किनारे रखकर आंसू बहाने के सिवाय कोई चारा ना था। इन मासूमों की सिसकियां हर किसी के दिल को दहला रही थी ।बुजुर्ग नाना भी गरीबी और बेबसी के मारे बच्चों के साथ आंसू बहाने को मजबूर थे। इन्हे यूं रोता-बिलखता देख वहां तमाशा देखने के लिए हुजूम लग गया लेकिन भीड़ में किसी एक ने भी इन किस्मतों के मारों की मदद करने की सोची भी नहीं । और फिर इन मासूमों का दर्द पीजीआई थाना के दरोगा रणविजय कुमार सिंह के कानों तक भी पहुंच गया और वे वहां आ गए।

मासूमों को रोता देखकर दरोगा का दिल भर आया

मां का शव रखे हुए मासूमों को रोते-सिसकते देख दरोगा का भी दिल भर आया। उन्होने फौरन 1500 रूपये निकाले और मौजूद भीड़ से भी मदद की अपील कर 3000 रूपये जुटा लिए। इसके बाद इस नेक दरोगा ने शाम करीब साढ़े चार बजे मासूमों की मां का अंतिम संस्कार कराया। पुलिसवाले की इस इंसानियत को देखकर हर कोई हैरान रह गया। फिलहाल नेकदिल पुलिसवाले की ये मानवीय तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। 

लेखक

Nisha Sharma

Police Media News

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