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WOMEN’S DAY SPECIAL : इन महिला पुलिस अधिकारियों के आगे बड़े बड़े सुरमा हुए नतमस्तक

WOMEN’S DAY SPECIAL : इन महिला पुलिस अधिकारियों के आगे बड़े बड़े सुरमा हुए नतमस्तक

आज 8 मार्च है ...यानी आज पूरा विश्व अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस मना रहा है। ये वो दिन है जब दुनियाभर की महिलाओं के प्रति सम्मान, प्रशंसा और प्यार प्रकट करते हुए उनकी उपलब्धियों को सम्मानित किया जाता है और उनके प्रति आभार प्रकट किया जाता है। पुलिस मीडिया न्यूज भी अपनी आज की विशेष पेशकश के जरिए देश की उन तमाम महिला पुलिस अधिकारियों के प्रति सम्मान प्रकट कर  रहा है जिन्होने वर्दी पहन देश का मान-सम्मान और गौरव बढ़ाया है। इन महिला पुलिस अधिकारियों ने न केवल अपनी हिम्मत, जज्बे और दिलेरी से अपराधियों के छक्के छुड़ा दिया बल्कि जुर्म का भी नामोनिशान मिटाने में अहम भूमिका निभाई। इन तेजतर्रार और दबंग लेडी सुपर कॉप से से तो कुख्यात से कुख्यात भी खौफ खाता है। 

मंजीता वंजारा –दुश्मनों के छक्के छुड़ाने में माहिर



अहमदाबाद की सुपरकॉप आईपीएस मंजीता वंजारा अक्सर चर्चाओं में रहती हैं। दरअसल अपराधियों के छक्के छुड़ाने में माहिर इस लेडी सुपर कॉप का जुदा अंदाज इन्हे लाइमलाइट में बनाए रखता है।आपको बता दें कि एक बार तो मैडम साहिबा बॉलीवुड की किसी एक्शन थ्रिलर की भांति बुर्का पहन कर जुए के अड्डे पर छापा मारने जा पहुंची और इनकी दिलेरी तो देखिए उनके साथ में सादी ड्रेस में बस एक सब इंस्पेक्टर था और अड्डे पर 28 हार्डकोर जुआरी मौजूद थे। ऐसे में पुलिस ऑफिसर के साथ कुछ भी होने का डर था,  हमला होने पर जान जाने का भी जोखिम था।  लेकिन इस दिलेर पुलिस लेडी ऑफिसर को कहां किसी से डर लगता है ये तो जो ठान लेती है उसे अंजाम तक पहुंचा कर ही दम लेती हैं। अहमदाबाद की एसीपी मंजिता के बड़े पापा और गुजरात के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट डीजी वंजारा 30 साल तक पुलिस विभाग के कई उच्च पदों पर रहे।  मंजिता ने भी हमेशा पुलिस की वर्दी पहन देश सेवा करने का सपना देखा . वह फिलहाल सहायक पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं. इसके पहले गांधीनगर की बीएड कॉलेज में प्रोफेसर भी रह चुकी हैं. वह विज्ञान की स्टूडेंट हैं. उन्होंने साल 2011 में सिविल सेवा की परीक्षा पास की थी और साल 2013 में वह एसीपी बनीं। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, गांधीनगर (NIFT) से ग्रेजुएशन किया है।मंजिता का पूरा परिवार आईएएस और आईपीएस से भरा हुआ है। हालांकि, उन्होंने परिवार के दबाव में नहीं, बल्कि समाज में कुछ अच्छा करने की चाहत से सिविल सेवा को चुना। मंजीता कहती हैं कि उनके लिए देश और समाज सबसे पहले है। पुलिस में नौकरी करने के बाद उन्‍हें वो सकूनू मिलता है, जो शायद एक मल्‍टीनेशनल कंपनी में काम करके नहीं आता

संजुक्‍ता पराशर- नाम से ही आतंकी तक थरथर्राते हैं



असम की महिला IPS अफसर संजुक्‍ता पराशर भी बहादुरी का दूसरा नाम हैं। आयरन लेडी के नाम से मशहूर संजुक्ता के नाम से आंतकी तक थर्राते हैं। वह साल 2006 बैच की IPS अफसर हैं, जो असम के सोनितपुर जिले में बतौर एसपी तैनात हैं। संजुक्‍ता पराशर ने बोडो उग्रवादियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन में मुख्य भूमिका निभाई हैं उनके नेतृत्व में पुलिस उग्रवादियों के लिए काल बन गई है। इस ऑपरेशन के दौरान 2015 में करीब 16 आतंकियों को मार गिराया, जबकि 64 को गिरफ्तार किया गया। वहीं 2014 में 175 और 2013 में 172 आतंकियों को जेल पहुंचाया दिया गया।  संजुक्‍ता ने राजनीति विज्ञान से दिल्‍ली के इंद्रप्रस्‍थ कॉलेज से ग्रेजुएट किया है. इसके बाद JNU से इंटरनेशनल रिलेशन में PG और US फॉरेन पॉलिसी में MPhil और Phd किया है. साल 2006 बैच की IPS संजुक्‍ता ने सिविल सर्विसेज में 85वीं रैंक हासिल की थी। उन्‍होंने मेघालय-असम कॉडर को चुना। असम उनका गृह राज्‍य भी है.
 

ऊषा किरण- मजबूत इरादों और हौसलों के लिए जानी जाती हैं



महिला दिवस पर महिला अफसरों की बात की जा रही है तो उषा किरण तो मजबूद इरादों और हौसलों की मिसाल है। ऊषा देश की पहली सीआरपीएफ महिला अफसर हैं, जिन्हें छत्तीसगढ़ के नक्सली इलाके में तैनात किया गया है छत्तीसगढ़ राज्य में सीआरपीएफ की 80वीं बटालियन में असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर तैनात ऊषा किरण मूल रूप से गुड़गांव की रहने वाली हैं। ऊषा ने 25 साल की उम्र में सीआरपीएफ ज्वॉइन कर ली थी। नक्सली इलाके में पोस्टिंग खुद ऊषा की पहली पसंद थी. ऊषा ने कहा था, 'वह खुद बस्तर आना चाहती हैं, उन्होंने सुना है कि यहां के लोग काफी सीधे-साधे होते हैं.' बताते चलें कि वह हर ऑपरेशन में जवानों की अगुवाई खुद करती हैं। इससे आप उनकी बहादुरी का अंदाजा लगा सकते है। वर्तमान में असिस्टेंट कमांडेंट ऊषा रायपुर से 350 किलोमीटर दूर बस्तर के दरभा डिवीजन स्थित सीआरपीएफ कैंप में तैनात हैं. 

अनीता प्रभा- कठिनाईयों से लड़कर बनी पुलिस अधिकारी



मध्य प्रदेश पुलिस में डीएसपी के तौर पर तैनात अनीता प्रभा (शर्मा) की कहानी भी बहुत मार्मिक और हौसला बढ़ाने वाली है। अनूपपुर जिले के छोटे से इलाके कोतमा की रहने वाली अनीता प्रभा ने 25 साल की उम्र में वो कर दिखाया था जिसकी कल्पना हर छात्र अपने जीवन में करता है। वैसे यहां आपको बता दें कि पुलिस अधिकारी बनना उनके लिए आसान न था। इस महिला पुलिस अधिकारी की जिंदगी तमाम उतार-चढ़ावों से भरी रही। कम उम्र में ही जीवन की मुश्किलें इनकी राह का रोड़ा बनने के लिए खड़ी हो गई। दरअसल 12वीं पास करते ही साल 2009 में माता-पिता के दबाव में आकर मात्र 17 साल की कम उम्र में उनकी शादी कर दी गई। अनीता के पति उनसे उम्र में 10 साल बड़े थे लेकिन अनीता में पढ़ने की ललक थी जिसके आगे ससुराल वाले भी झुकने को मजबूर हो गए । और फिर ससुराल वालों ने ग्रेजुएशन करने की अनुमति दे दी। लेकिन किस्मत देखिए, ग्रेजुएशन के फाइनल ईयर में पति के एक्सीडेंट के कारण वह एग्जाम नहीं दे सकीं। और फिर घर की आर्थिक मदद के लिए ब्यूटीशियन का कोर्स किया और पार्लर में काम करना शुरू किया। लेकिन अपने कैरियर को लेकर महत्वाकांक्षी अनीता और उनके पति के बीच बात अब बिगड़ने लगी थी। जिसके बाद अनीता ने साल 2013 में व्यापम की फॉरेस्ट गार्ड की परीक्षा दी। चार घंटे में 14 किलोमीटर पैदल चलकर परीक्षा पूरी की। दिसंबर 2013 में उन्हें बालाघाट जिले में पोस्टिंग मिली. इसके बाद सब-इंस्पेक्टर बनी. लेकिन कुछ कर दिखाने की जिद ने आज उन्हें डीएसपी बना दिया.

मैरीन जोसेफ़- युवा आईपीएस अधिकारी बनने का रिकार्ड 



मैरीन जोसेफ केरल राज्य से हैं, उनके नाम युवा आईपीएस अधिकारी बनने का भी रिकॉर्ड है बताया जाता है कि मैरीन जोसेफ को उनके काम से पहचाना जाता है जनता में उनकी उनकी बहुत ही सकारात्मक छवि है बताते हैं कि जोसेफ आम लोगों की काफी मदद करती हैं कभी भी उन्हें फोन कर उनकी मदद ली जा सकती है वैसे मैरीन जोसेफ को देश की सबसे खूबसूरत महिला आईपीएस अफसर के नाम से भी जानी जाती हैं 2016 में वे राज्य स्वतंत्रा दिवस परेड को कमांड करने वाली सबसे कम उम्र की अफसर भी बनीं हैं। 

मीरा बोरवांकर- इनके नाम से मुंबई का अंडरवर्ल्ड भी खौफ खाता है



मीरा बोरवांकर के नाम से मुंबई का अंडरवर्ल्ड भी का कांपता है बताते हैं मीरा महाराष्ट्र की पहली महिला क्राईम ब्रांच अधिकारी हैं इनकी बहादुरी के चलते इन्हें राष्ट्रपति मेडल से भी सम्मानित किया जा चुका है मीरा ने मुम्बई के सबसे चर्चित केसों में जलगांव स्कैंडल, इकबाल मिर्ची, अबु सलेम जैसे केस को भी सुलझा चुकी हैं इसके अलावा वह कई बड़े केस भी सुलझा चुकी हैं।

संगीता कालीया- दो बार एक ही मंत्री से भिड़ गई थी



संगीता कालीया में आईपीएस बनने की ललक थी, इसके लिए उन्हें तीन बार परीक्षा देनी पड़ गई बताते हैं कि संगीता ने दो बार यूपीएससी की परीक्षा पास की, लेकिन दोनों बार उन्हें आईएएस के लिए चुना गया इसके बाद उन्होंने तीसरी बार परीक्षा दी, और उन्हें आईपीएस की रैंक मिल गई। आईपीएस संगीता कालिया 2010 बैच की आईपीएस अफसर हैं और हरियाणा में SP पद पर हैं, जिनकी 27 नवंबर 2015 को फतेहाबाद में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से बहस हो गई थी। उस समय अनिल विज वहां के कष्ट निवारण समिति के अध्यक्ष थे। एक शिकायत की सुनवाई के दौरान विज ने कालिया को 'गेट आउट' कह दिया था। कालिया बाहर नहीं गई तो विज को खुद बैठक छोड़नी पड़ी थी।  लेकिन बाद में कालिया का ट्रांसफर भी कर दिया गया था। वहीं दोबारा भी संगीला कालिया विज से भिड़ गई और बदले में फिर इनका तबादला कर दिया गया। 

मंजिल सैनी- बहादुर पुलिस अफसरों में होती है गिनती



मंजिल सैनी देश की पहली आईपीएस है। मंजिल सैनी ने शादी हो जाने के बाद IPS के लिए क्वालिफाई किया है। कहा जाता है कि 2013 में मुजफ्फरनगर में दंगे के दो दिन पहले इन्हें वहां से हटा दिया गया था। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर मंजिल सैनी वहां होतीं तो दंगे नहीं होते। इनकी गिनती बहादुर पुलिस अफसरों में होती है। किडनी रैकेट का भंडाफोड़ करने से लेकर चेकिंग के दौरान गाड़ियों से काली फिल्म और झंडा उतरवाने व 24 घंटे के अंदर अपराधियों की धड़पकड़ का काम ये बेधड़क करती हैं। मृदुभाषी होने के साथ बेअंदाज मातहतों को सख्त करके कानून व्यवस्था के मुद्दे पर आगे बढ़कर मोर्चा संभालती हैं। लखनऊ में कप्तान रहते हुए आईपीएस मंजिल सैनी ने तैनाती के हफ्ते भर में माहौल समझ लिया था और इसके बाद मेहनत और अपने काम से नागरिकों का विश्वास जीता। इससे आला अफसर भी हैरत में थे। महिलाओं का विश्वास जीतने के लिए महिला पुलिस अधिकारियों की टीम गठित करके ‘शक्ति दिवस’ शुरू कराया। थाने के चक्कर काट रही महिलाओं की शिकायत पर तेजी से कार्रवाई और लापरवाह पुलिसकर्मियों के निलंबन से मामले लटकाए रखने की परंपरा खत्म की।

रूपा डी मुद्गल- राजनीतिक भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाई आवाज



आज के दौर में ऐसे कम ही अधिकारी होते हैं जो अपने आर्दश के लिए जाने जाते हैं। उन्हीं नामों में से एक रूपा मुद्गल का भी नाम शामिल है। रूपा ने अपनी जिम्मेदारी निष्ठा से निभाते हुए जेल व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर किया। साथ ही AIDMK की महासचिव शशिकला के जेल यात्रा के दौरान उन्हें दी जाने वाली स्पेशल ट्रीटमेंट के खिलाफ नेशनल मीडिया की सुर्खियों में भी रह चुकी हैं।आईपीएस ऑफिसर रूपा का एक पुलिस अधिकारी के रूप में अच्छा रिकॉर्ड रहा है। इन्होंने 2004 के दौरान मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती को भी गिरफ्तार किया था। यहां तक कि उन्होंने कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाली गाड़ी को भी हटा दिया था। यह वजह थी कि 17 साल के करियर में इनका लगातार ट्रांसफर किया गया। कई बार तो एक साल के अंदर दो बार ट्रांसफर कर दिया

लेखक

Nisha Sharma

Police Media News

1 Comments

  • जो भी करमचारी परेशान हैं उसकी अवाज उठाने वाला कोई नहीं है जिसकी वजह से उसका मनोबल डाउन हो सकता है

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