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फ़र्ज़ी मुठभेड़ केस में सिपाहियों की जमानत रद्द

फ़र्ज़ी मुठभेड़ केस में सिपाहियों की जमानत रद्द

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फ़र्ज़ी मुठभेड़ में चार मजदूरों की हत्या के आरोपी सिपाही सूर्यभान और सुभाष चंद्र की जमानत अर्जी रद्द कर दी है. दोनों आरोपियों को निचली अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. यह आदेश न्यायमूर्ति विपिन सिन्हा और न्यायमूर्ति ईफाकत अली खान की खंडपीठ ने दोनों पुलिसकर्मियों की आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ दाखिल अर्जी की सुनवाई करते हुए दिया है. 

दोनों पक्षों के वकीलों ने रखा पक्ष

सीबीआई की ओर से अर्जी पर अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश और याचीगण की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल चतुर्वेदी ने पक्ष रखा. गौरतलब है कि वर्ष 1996 में हापुड़ गाज़ियाबाद रोड पर पुलिस ने चार मजदूरों को पकड़ा और मोदीनगर रोड के पास गन्ने के खेत में मुठभेड़ दिखाते हुए मार डाला था. मुठभेड़ को सही दिखाने के लिए कई थानों की पुलिस को भी बुलाया गया था.

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सीबीआई को सौंपी गयी थी जांच

पुलिस ने दोपहर में फायरिंग शुरू की और चार कथित बदमाशों को मार गिराने का दावा किया. पुलिस के हाथों जसवीर उर्फ़ पप्पू, जलालुदीन, अशोक और परवेज की मौत हुई. स्थानीय लोगों के विरोध व सुबूतों के आधार पर राज्य सरकार ने घटना की जांच सीबीआई को सौप दी थी. 

न्यायालय ने खारिज की अर्जी

गाज़ियाबाद की सीबीआई कोर्ट ने थाना प्रभारी लाल सिंह व तीन पुलिस कर्मियों रणवीर सिंह, सूर्यभान व सुभाष चंद्र को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. इनमे सिपाही रणवीर सिंह की मृत्यु हो चुकी है. बाकी तीनो जेल में सज़ा काट रहे हैं. सज़ा काट रहे दो सिपाहियों ने ही हाई कोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दी थी जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया.

संवाददाता

Ankit Tailor

Police Media News

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