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IPS सचिन के ‘ऑपरेशन पवित्र’ से महाकाल की नगरी हुई अपराध मुक्त

IPS सचिन के ‘ऑपरेशन पवित्र’ से महाकाल की नगरी हुई अपराध मुक्त

अपनी फिटनेस और दमदार पर्सनेलिटी  के कारण लाइमलाइट में छाए रहने वाले उज्जैन, मप्र के पुलिस अधीक्षक सचिन अतुलकर की कार्यशैली और पुलिसिंग भी लाजवाब है। आपको बता दें कि उनके काम करने का तरीका पुलिस विभाग के लिए मिसाल बनकर उभरा है। वहीं बतौर एसपी सचिन अतुलकर का ये तीसरा जिला है। लेकिन खास बात ये है कि उन्होंने तीनों जिलों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार पुलिसिंग कर अपराधियों को धूल चटाई है।यही वजह है कि तीनों जिलों की जनता एसपी साहब को पलकों पर बैठाते हैं।  

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काम के अंदाज ने बनाया हर दिल अजीज

20 जुलाई 2017 को धर्मनगरी उज्जैन में जब सचिन अतुलकर ने चार्ज संभाला तो उनका एक ही मकसद था जिले से अपराध और अपराधियो का सफाया करना। और फिर अपने इसी मकसद को हकीकत में तब्दील करने क लिए उन्होने ऑपरेशन ‘पवित्र’ चलाया। एसपी सचिन अतुलकर के मुताबिक ये इतना आसान नहीं था। इसके लिए उन्हे सबसे पहले जनता के विश्वास को पाना जरूरी था वहीं निष्पक्षता स्थापित करना भी बेहद आवश्यक था। इसलिए उन्होने अपने मकसद को कामयाब बनाने के लिए पहले अपने महकमे के लापरवाह अफसरों की लगाम कसी और फिर उन्होने बदमाशों को जिले से बाहर खदेड़ने के ऑपरेशन को अमलीजामा पहनाया। इस दौरान अतुलकर के सामने कई चुनौतियां आई। जिले में हत्या के प्रयास, चेन स्नेचिंग, चाकूबाजी की सिलसिलेवार वारदातों से दहशत फैली हुई थी। और फिर अतुलकर ने अपराध और अपराधियो की कमर तोड़ने के लिए ऑपरेशन ‘पवित्र’ चलाया। इसके तहत अपराध और अपराधियों के रिकॉर्ड बनाए गए। आदतन अपराधियों की फेहरिस्त तैयार की गई। अतुलकर के अनुसार, जो व्यक्ति एक बार अपराध करता है तो उसके दोबारा अपराध करने की संभावना ज्यादा रहती है। इसके बाद अपराध की गंभीरता को देखते हुए कार्रवाई की गई। वहीं ऑपरेशन पवित्र के तहत बदमाशों की ईंट से ईंट बजाने में लगे एसपी अतुलकर ने अपने विभाग के कई लचर अफसरों को भी निलंबित, लाइनअटैच कर कार्रवाई की। कुछ थाना प्रभारी तो केवल एफआइआर नहीं लिखने जैसी शिकायतों पर निलंबन की सूली चढ़े। सचिन अतुलकर के सख्त तेवरों को देख अब महकमें के पुलिसकर्मी खौफ खआने लगे वहीं अतुलकर की छवि एक सख्त अधिकारी के रूप में उभरी और उन्होने जनता का भरोसा पाने में भी सफलता पाई 

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नक्सलग्रस्त क्षेत्र में भी मनवाया काम का लोहा

34 वर्षीय सचिन अतुलकर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जन्मे हैं और वे 2007 बैच के आइपीएस अफसर हैं। उज्जैन से पहले वे बालाघाट और सागर जिलों में पदस्थ रह चुके हैं। नक्सल प्रभावित इलाके बालाघाट में उन्होंने दो नक्सलियों को मुठभेड़ में मार गिराया था। बालाघाट में तीन साल के कार्यकाल में उन्होने कई कई ऑपरेशन को अंजाम तक पहुंचाया। इस उपलब्धि के लिए सचिन को राज्य और केंद्र शासन द्वारा सम्मानित भी किया गया।वहीं बालाघाट के बाद अतुलकर सागर के एसपी नियुक्त हुए। यहां उनकी चर्चा लंबित अपराधों को खत्म करने को लेकर हुई। सागर में साढ़े तीन साल के कार्यकाल के बाद जब वे रिलीव हुए तो सैकड़ों नागरिकों ने अपने अजीज एसपी के सम्मान में सड़क पर उतर उनका अभिवादन किया था।

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500 बदमाशों को किया जिलाबदर और 90 पर लगी रासुका

वहीं ऑपरेशन पवित्र के तहत बीते एक साल में उज्जैन जिले के 500 बदमाशों को जिलाबदर किया गया है। वहीं 90 पर रासुका यानी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की गई है। इतनी बड़ी संख्या में जिलाबदर और रासुका की कार्रवाई पहली बार हुई है। इसके अलावा सैकड़ों बदमाशों पर प्रतिबंधात्मक धाराओं में कार्रवाई की गई। खास बात ये है कि जिन बदमाशों पर कार्रवाई की गई है उन पर हर सप्ताह नजर रखी जाती है। इससे बदमाश भी काफी दहशत में नजर आ रहे हैं ।वहीं रात में वारंट तामिली पुलिस के काम का एक हिस्सा है। मगर जिला पुलिस कॉम्बिंग गश्त कर एक ही रात में 100 से अधिक वारंट तामिल कराती रही है। 2017 के मुकाबले 2018 में जिले में जानलेवा हमलों, लूट, चेन स्नेचिंग और चाकूबाजी की घटनाओं में काफी कमी आई।

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अपराधियो को सजा दिलाकर ही दम लेते हैं

एसपी सचिन अतुलकर अपराध का खुलासा तो करने में माहिर है हीं वहीं वे आरोपियों को सजा दिलाने के लिए भी जाने जाते हैं। 15 अगस्त 2018 को घट्टिया के ग्राम जलवा में रहने वाली चार साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने किशोर न्याय बोर्ड में 6 दिन के भीतर ही चालान पेश कर दिया था। बोर्ड ने 6 घंटे के भीतर ही सजा भी सुना दी थी।गौरतलब है कि अपराध के 6 दिन के भीतर ही चालान पेश किए जाने और कुछ घंटों के भीतर ही सजा सुनाए जाने के कारण यह मामला काफी सुर्खियों में रहा था । दरअसल ये पहला केस था जब पुलिस ने इस तरह के अपराध में 6 दिन में ही जांच पूरी कर चालान पेश कर दिया था।

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बिना डर और पक्षपात की नीति पर पुलिस काम करे

वहीं उज्जैन एसपी सचिन अतुलकर का कहन है कि पुलिस को नागरिकों का विश्वास जीतना बेहद जरूरी है। जो कमजोर वर्ग के हैं, उनकी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। विदआउट फियर एंड फेवर यानी बिना डर और पक्षपात की नीति पर पुलिस काम करे। बकौल सचिन पुलिस अगर ठान ले तो  समाज को अपराधमुक्त बनाना नामुमकिन नहीं है और उज्जैन में ऐसा हो रहा है।सचिन के मुताबिक ऐसा तब ही संभव है जब पुलिस अधिकारी महकमे और टीम को दुरुस्त रखेंगे। इससे जनता में अच्छा संदेश जाएगा और वे पुलिस के साथ खड़ी होगी और फिर स्वतंत्र होकर ऑपरेशन पवित्र जैसी मुहिम को अमलीजामा पहनाया ज सकता है।

लेखक

Sandhya mishra

Police Media News

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