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जाँच के नाम पर खेल करने वाले दरोगाओं की गर्दन फंसी

जाँच के नाम पर खेल करने वाले दरोगाओं की गर्दन फंसी

जाँच के नाम पर खेल करने वाले दरोगाओं की गर्दन फंसी
न्यायालय के आदेश पर जाँच शुरू

लखनऊ के गोमतीनगर में युवती से रेप व अश्लीलता के मामले में आरोपियों को क्लीनचिट देकर फंसे दरोगा वीरेंद्र यादव और राय बहादुर सिंह के खिलाफ पद के दुरुपयोग और मनगढ़ंत साक्ष्य तैयार करने की धारा में न्यायलय ने एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए है ।
 
पीड़िता के अधिवक्ता जीशान अख्तर सिद्दीकी ने बताया कि पीड़िता ने कोर्ट में अपने पिता सहित पांच लोगों के खिलाफ बयान दिया था। इसके बावजूद विवेचकों ने जांच में खेल करते हुए फाइनल रिपोर्ट लगा दी।

क्या था मामला

प्रभारी निरीक्षक गोमती नगर ने बताया कि युवती अपने प्रेमी के साथ घर से भाग गई थी। उसके पिता ने प्रेमी के खिलाफ बहला-फुसलाकर भगाने का केस दर्ज करा दिया। हालांकि, बाद में युवती खुद ही कोर्ट पहुंच गई और उसने प्रेमी से शादी की बात कहते हुए पिता व उनके चार साथियों को ही कठघरे में खड़ा कर दिया।
 
क्या कहा लड़की ने

युवती ने कहा कि वह घर से भागी नहीं थी। न ही उसे कोई भगाकर ले गया था। वह अपने पिता और उनके साथियों से डरकर चली गई थी। उसने चारों युवकों पर बुरी नजर रखने और छेड़छाड़ व रेप करने का आरोप भी लगाया। उसने पिता से शिकायत की तो वह आरोपियों का ही साथ देने लगे। इस पर वह घबराकर घर से भाग गई और अपने प्रेमी से विवाह कर लिया। युवती ने कोर्ट में पिता व चारों प्रॉपर्टी डीलर के खिलाफ बयान दिया जिसके आधार पर रेप, अश्लील हरकतें सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। इस मामले की विवेचना गोमतीनगर थाना में तैनात वीरेंद्र यादव व उनके बाद राय बहादुर सिंह ने की थी ।

अधिवक्ता जीशान अख्तर का कहना है कि दोनों विवेचकों ने अपने कर्त्तव्य का पालन नहीं किया। पद का दुरुपयोग करते हुए उन्होंने जांच में फर्जी व मनगढ़ंत साक्ष्य तैयार करके दोषियों को लाभ पहुंचाया और केस में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। सीजेएम कोर्ट के आदेश पर दोनों के खिलाफ गोमतीनगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। 

मुख्य संवाददाता

Police Media

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