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Happy mother's day : मां एक शब्द ना होकर हम सबके लिए एक संसार है - आईपीएस विजय गुर्जर

Happy mother's day : मां एक शब्द ना होकर हम सबके लिए एक संसार है - आईपीएस विजय गुर्जर

हमारे जीवन के आरंभ, विकास, अनुभव, कार्य, सोच और व्यक्तित्व सब कुछ हमारी मां से काफी हद तक प्रेरित होता है। मैं अपने बचपन से ही अपनी मां श्रीमती चंदा देवी से बहुत प्रेरित रहा हूं। कृषि कार्य ज्यादा होने के कारन पिताजी अक्सर हमारे अध्ययन पर ध्यान नहीं दे पाते थे, ऐसे में निरक्षर होते हुए भी माँ ने हम सारे भाई बहनों के अध्ययन का हमेशा ध्यान रखा। किसने गृह कार्य किया, किसने नहीं किया, कौन आजकल पढ़ाई कर रह है, कौन नहीं। किसको सुबह जगाना है, कब जगाना है। उन्होंने हमेशा हमारी बुरी आदतों की कड़ी निगरानी की। गाँव में मेरे कुछ सहपाठी धूम्रपान करते थे, माँ को शक था कही हम लोग इन आदतों में न पड़ जाये तो हमारा मुँह सूंघकर कभी भी हमारी परीक्षा ली जाती थी। मैंने आज तक उनको कभी भी सुबह देर तक सोते हुए नहीं देखा हमेशा वह हम सबसे पहले उठती हैं और हम सब के बाद सोती हैं। 


मां से सीखा समर्पण भाव

अपनी यूपीएससी की तैयारी के दौरान जब भी मैं थक जाता था, पढ़ने का मन नहीं करता था तो जो बात मुझे सबसे ज्यादा प्रेरित करती थी वह मेरी मां के काम करने की घंटे थे। शायद कभी भी उन्होंने अपने जीवन में 15 घंटे से कम काम नहीं किया, यह याद करके मेरा हौसला बढ़ता था और मैं ऑफिस से थका होने के बावजूद मैं उसी समर्पण भाव से अपने अध्ययन में वापिस लग जाता था।

तनाव से निपटना मां ने सिखाया

तनाव प्रबंधन वर्तमान समय की की मुख्य आवश्यकता है चाहे सिविल सेवा की बात हो या जीवन की। मैंने अपने जीवन में तनाव प्रबंधन अपनी माँ से ही सीखा है। चाहे ओलावृष्टि और अकाल आदि के कारण फसल खत्म हो गई हो, हम भाई बहनों में से किसी का परीक्षा परिणाम खराब हो गया हो या और कोई तनाव वाली बात हो। मैंने कभी अपनी मां को रोते हुए नहीं देखा, समस्या चाहे पारिवारिक हो, व्यक्तिगत हो या हमारे प्रोफेशन से संबंधित हो, उन्होंने ना केवल हमेशा उसका हिम्मत से सामना किया है, अपितु हम सब को भी हिम्मत के साथ समस्याओं से लड़ने की प्रेरणा दी है।

सेवा भाव माँ से आया

अपने व्यक्तिगत जीवन में नैतिक मूल्यों का पालन करना, विनम्र रहना, हर परिस्थिति में दूसरे की स्थिति को समझना, सभी व्यक्तियों का सम्मान करना, अपनी उपलब्धियों पर गर्व नहीं करना और अपने पास उपलब्ध संसाधनों के साथ सेवा के लिए तत्पर रहना यह ऐसे गुण हैं जो अनायास ही मेरी मां की देन है। संभवतः उन्होंने सर मानेक्शा के यह शब्द तो नहीं सुने होंगे की "A 'yes man' is a dangerous man. He is a menace." लेकिन उन्होंने हमेशा हमें खुलकर अपने विचार रखने के लिए प्रेरित किया, चाहे सामने वाला उससे सहमत हो या ना हो। शायद इसी वजह से मैं अपने वरिष्ठों के समक्ष अपनी बात रखने और सुझाव देने में कभी नहीं हिचकता।

खुलकर विचार रखने के लिए मां करती थी प्रेरित

मेरी पुलिस सेवा में आने के बाद हमेशा उन्होंने इस बात की अवश्य निगरानी की है कि मेरा व्यवहार दूसरे लोगों के साथ विनम्रता पूर्ण है या नहीं। उन्होंने हमेशा मुझे कठिन परिश्रम करने और ऊंचाइयां हासिल करने के लिए तो प्रोत्साहित किया ही है, साथ ही हमेशा अपने पांव जमीन पर रखने और विनम्र बने रहने के लिए भी तैयार किया है। संसार में माँ जैसा संवेदनशील, चिंता करने वाला, समझने वाला, प्रेम करने वाला और सदैव हित चाहने वाला रिश्ता कोई अन्य नहीं हो सकता है, तभी कहा गया है - "जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।"

लेखक गुजरात गुजरात कैडर 2018 बैच के आईपीएस विजय सिंह गुर्जर हैैं जो कि फिलहाल हैदराबाद में ट्रेनिंग पर हैं

मुख्य संवाददाता

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