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लखनऊ में हुए विवेक हत्याकांड से जुड़े 10 बड़े सवाल

लखनऊ में हुए विवेक हत्याकांड से जुड़े 10 बड़े सवाल

उत्तरप्रदेश की पुलिस के दो सिपाहियों पर एक बेकसूर की हत्या करने का इल्जाम है। जहां एक तरफ सीएम योगी इस मामले को लेकर सख्त रूख अख्तियार करते हुए उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की बात कर हैं । तो वहीं डीजीपी ओपी सिंह  विवेक तिवारी हत्याकांड में माफी मांगते दिख रहे हैं और अपने अधिकारियों को जनता के साथ सही आचरण का उपदेशे दे रहे हैं लेकिन चौंकाने वाली बात तो ये है कि योगी सरकार की पुलिस और कप्तान साहब का महकमा उन्ही की नाक के नीचे इस हत्याकांड पर खेल खेल रही है। दरअसल पुलिसिया कहानी कुछ और कह रही है और कागजी जुबान कुछ और कहानी बयां कर  रही। ऐसा घालमेल तैयार किया जा रहा है कि आरोपी सिपाही साफगोई बच निकले। लेकिन मीडिया में बात फैलने के बाद एक ही मामले में राजधानी ने पहली बार दूसरी एफआईआर दर्ज की गई ।


पहली एफआईआर में पुलिस ने किया खेल

शुक्रवार की आधी रात को हुए इस हत्याकांड की मृतक विवेक की सहकर्मी सना की तरफ से एफआईआर दर्ज कराई गई । तहरीर सना से तो ली गई, लेकिन उसका मजमून गोमतीनगर थाने के पुलिसकर्मियों ने खुद लिखा। तहरीर में बाइक से दो पुलिसकर्मियों के आने का जिक्र तो किया गया, लेकिन विवेक पर गोली किसने चलाई? इसका एफआईआर में कहीं जिक्र नहीं है।  इतना ही नहीं एफआईआर में साफ-साफ देखा जा सकता है कि हत्यारे पुलिसकर्मियों के नाम भी कहीं शामिल नहीं हुआ है बल्कि किसी अज्ञात को इस हत्याकांड का दोषी माना गया ।आरोप यह भी है कि आरोपी सिपाहियों को बचाने के लिए विवेक की एक्सयूवी को बाद में बुरी तरह क्षतिग्रस्त किया गया। आरोपी सिपाहियों के साथियों ने भी अपने अधिकारियों, मीडिया और विवेक के परिवार के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों के साथ मोर्चा खोल दिया है।  सरकार के कई विधायक और मंत्रियों ने सीएम योगी को पत्र लिखकर लखऩऊ के डीएम औऱ एसएसपी पर कार्रवाई की मांग की है । यहां तक की सूबे के कानून मंत्री ने खुद ही कानून के रखवालो पर सवाल उठाये हैं । साथ ही मामले में लिपापोती करने वाले उच्च अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है ।

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मामले से जुड़े 10 बड़े सवाल 


पहला सवाल - आखिर एक ही केस में लखनऊ पुलिस को 2 एफआईआर दर्ज करने की जरूरत क्यों पड़ी,क्या केस को कमजोर करने की थी साजिश  ?

दूसरा सवाल - आई विटनेस सना के मुताबिक 2.5 मीटर की दूरी से सिपाही ने गोली चलाई थी वंही  सिपाही का कहना है कि उसे गाड़ी के अंदर कुछ नहीं दिखा ये कैसे मुमकिन है ?

तीसरा सवाल - जब सिपाही को गाड़ी के अंदर का कुछ दिखा ही नहीं तो ये बात कैसे कह दी गई कि कार में दोनो आपत्तिजनक हालत में थे ?

चौथा सवाल - अगर सिपाही इतने ही दूध के धुले थे तो क्यों मौके से भाग गए । क्यों नहीं उन्होने विवेक को अस्पताल ले जाने की जरूरत नहीं समझी ?

पांचवा सवाल - आखिर पुलिस ने मृतक के परिजनों को घटना के बारे में जानकारी क्यों नहीं दी । परिजनों को तो अस्पताल के कर्मचारियों से इस बाबत जानकारी मिली ?

छठा सवाल - गिरफ्तारी के बावजूद आरोपी सिपाही लखऩऊ के थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए हंगामा क्यों करता रहा । जबिक एसएसपी साहब के मुताबिक तो उसे जेल भेज दिया गया था ?

सातवां सवाल - गिरफ्तार होने के बावजूद सिपाही को मीडिया को बाइट देने की अनुमति कैसे दी गई ?

आठवां सवाल - आखिर क्यों चश्मदीद सना को 17 घंटे तक लखनऊ पुलिस ने नजरबंद रखा ?
 
नंवा सवाल - आखिर क्यों थाने में घटना कि हत्याकांड की चश्मदीद सना से लखनऊ पुलिस ने खाली कागज़ मे हस्ताक्षर करवाये ?

दसवां सवाल - रिपोर्ट में लिखा गया है कि प्रशांत ने ही फायर किया था, तो आखिर उसके साथ मौजूद संदीप ने उसे क्यों नही रोका या फिर तुरंत इसकी जानकरी विभाग को क्यों नहीं दी ?

लेखक

Nisha Sharma

Police Media News

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